शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

लोकसभा : २०१४

वि. स. चुनाव ख़त्म हुए - लोकसभा चुनावों कि रणभेरी बजने लगी है !!
परिणाम शानदार रहे हैं - जे पी के बाद कुछ ताज़ी बयार चली है !! 
बी जे पी और कांग्रेस के पैरो तले जमीन खिसकी हुयी है - सच कहें तो ये नेताओं के लिए विश्वसनीयता का सन्कट है !! 
इस संकट से उबरने के लिए सिर्फ विश्वसनीयता की जरूरत है - आप कितने भी चतुर पैतरे बाज़ कौटिल्य या विदुर हों अगर आप विश्वसनीय नहीं है तो आप संकट में हैं !! 
ये नेताओ को समझ में आ गया है, वे सिर जोड़ के मंथन कर रहे हैं ; नए पैतरे सोच रहे हैं ,  

अब अशोक रोड का दफ्तर हो या अकबर रोड का सभी एक ही बात पर चिंतन कर रहे हैं !!

जनता भी चिंतन कर रही है, वह कम बुरे और ज्यादा बुरे में कम बुरे को चुन रही है या किसी नयी पार्टी को विकल्प बनाना चाह रही है !!

दिल्ली के विधान सभा चुनावों में जो हुआ वह लोकसभा में होगा ऐसा नहीं है - शहरी मतदाता "आप" को वोट कर सकते हैं - पड़े लिखे ग्रामीण मतदाता भी आप कि तरफ आकर्षित हो सकते हैं ; पर आज भी भारत की ८०% लोकसभाओं की ७०% जनता ग्रामीण है, और ग्रामीण जनता "आप" से ज्यादा परचित नहीं है ; विधान सभा चुनावों से इतर लोकसभा चुनाव का मिज़ाज़ अलग है. 
लड़ाई विश्वसनीयता की है, साथ में कांग्रेस के प्रति एक अजीब तरह का गुस्सा है इसे हम खीज़ भी कह सकते हैं ; इसका १ मात्र बड़ा कारन महगाई है, कुछ छोटे कारन भी हैं, जिसमे दिग्गी, मनीष तिवारी, श्री प्रकाश, बेनी के बयान भी आते हैं !!
लोकसभा कि स्तिथियाँ भी कमोबेश वही होंगी जो म. प्र और छ. ग में हुयी !!
जनता ने निष्क्रिय बड़े मंत्रियों को हराया, कांग्रेस के २७ विधायको को पटखनी दी, जबकि इस चुनाव में भीतर घात कांग्रेस में नहीं के बराबर था !!
म. प्र. में भी यही परिस्तिथियाँ थी !!
अगर भ ज पा प्रत्याशी बहुत बुरा था तभी वह हारा है, अन्यथा शिवराज कि छवि ने हर भ जा पायी को जिताया है !!
कांग्रेस के पास आज लोकसभा चुनाव के लिए विश्वसनीय चेहरा नहीं है; आज गांधी परिवार में एक ऐसे नेता कि कमी महसूस होती है जिसने जनता के लिए बगावत की हो और जो जनता (ग्रामीण)से सीधा संवाद कर सके @@
राहुल गांधी आज कुछ विदेशों में पढ़े युवाओं और घाघ राजनैतिक लोगों द्वारा घेर लिए गए प्रतीत होते हैं; उनके अपने पूर्वाग्रह स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हैं !!
प्रियंका गांधी को अपने परिवार से फुर्सत नहीं है, सोनिया गांधी संवैधानिक पद ले नहीं सकती !!
मनमोहन जैसे ईमानदार और बुद्धिमान व्यक्ति की छवि का कबाड़ा कर दिया गया है, मनमोहन पर भी जनता विश्वास करने तैयार नहीं है !!
ऐसे में उत्तर भारतीय, हिंदी भाषी मतदाता को मोदी ही एक मात्र विकल्प दिखता है !!
भ जा प् का दक्षिण में जनाधार नहीं है ; पर कांग्रेस में विश्वसनीयता और स्पष्ट नेतृत्व का आभाव है इसका फायदा क्षेत्रीय पार्टियां उठाएंगी !!
कांग्रेस को चाहिए कि प्रियंका गाँधी को प्रधान मंत्री पद का दावेदार प्रस्तुत करें और २०१४ लोकसभा में प्रियंका कि छवि का फायदा लें !! #जयहो 
अवस्थी सचिन 
२०/१२/१३ 

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