बुधवार, 1 जून 2016

डरपोंक गांधी ?

कांग्रेस पर यह लेख मेरे स्वयं के विचार हैं और हर उस व्यक्ति, संस्था, संगठन एवं कंपनी को मैं इसे शेयर करने व छापने का अधिकार इस बाध्यता के साथ देता हूँ कि वे इस लेख की आत्मा के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे !!
अवस्थी सचिन
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कांग्रेस भारत का सबसे पुराना राजनैतिक दल है ; वह दल जिसके सबसे बड़े नेता मोहनदास करमचंद गांधी को भी उनके जीवित रहते उनके ही साथीयो ने चुनौती दी और गांधी ने उस चुनौती को खुले दिल से स्वीकार किया और नेताजी ने जिस चुनाव में गांधी के प्रत्याशी को पूर्ण बहुमत से हराया उस चुनाव को जीतने के बाद भी गांधी को दुखी देखकर नेता जी ने गांधी के चरणों में अपनी जीत की माला डाल दी थी !
जबकि वे पूर्ण बहुमत से चुने हुए अध्यक्ष थे !!
आज वही कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष का तो छोड़ दें प्रदेश और जिला अध्यक्ष का निष्पक्ष चुनाव नहीं करवा पा रही !
क्या हो गया है कांग्रेस को ?
नेहरु के सामने उनकी पार्टी में ही कई चुनौतियां आईं और वे हर बार उस चुनौतियों से लडे और जीते !
नेहरू के बाद इंदिरा ने काफी कमज़ोर शुरुवात की और इंदिरा ने उस मुकाम को हासिल किया जिस मुकाम पर लोग "इंडिया इस इंदिरा एंड इंदिरा इस इंडिया" का नारा लगाने लगे थे !
मोतीलाल से लेकर राजीव तक इस परिवार को कोई भीरु नहीं कह सका - पर आज देश की जनता राहुल और सोनिया को रणछोड़ दास या कायर की उपाधि देती है ?
रणछोड़ दास कैसे ?
यह बड़ा प्रश्न है पर उत्तर बड़ा छोटा सा है !!
वे अपने आपको गांधी नेहरु का वंशज कहते हैं पर उनका कलेजा पार्टी के भीतर भी चुनाव कराने का नहीं है !
                                                                               
आप किसी पार्टी से हों किसी विचार धरा को मानने वाले हों जरा आँख बंद करके विचार करें क्या कोई ऐसा व्यक्ति जो स्कूल या कॉलेज में दोस्त न बना पाया जिसने कभी हिंदी अखबार न पढे, जो देश में बनी फिल्मों को न समझ पाया हो जिसने प्रेमचंद, रबींद्रनाथ को न पढ़ा हो - जो देश की संस्कृति से वाकिफ न हो वह क्या वह देश चला सकेगा ?
यह एक बड़ा भय है जिससे लड़ने की सोनिया राहुल ने कभी कोशिश नहीं की !
इसी डर के साये में सोनिया ने देश चलाया है और राहुल चलाने का सपना संजो रहे हैं !!
और किसी भी क्षत्रप की कद्दावर छवि ही एक ऐसी चीज़ है जिससे उनके गांधी परिवार को नींद में भी डर लगता है !
डर तो बहुत हैं प्रथम परिवार के मन में जिसे समय समय पर वे जाहिर भी करते रहते हैं - उनमे से कुछ प्रमुख डर हैं !
१- आतंक के सरदारों का डर !
२- कोई उनकी राजनैतिक सत्ता को चुनौती न दे दे इसका डर !
३- विदेश में बैठे बड़े धर्म गुरुओं का डर
४- अपनी राजनैतिक और सामाजिक हैसियत बचाए रखने का डर
५- अपनी अज्ञानता और अशिक्षा का डर
६- अपनी निजिता का डर
७- धर्म, शिक्षा, रिश्ते, बीमारी के उजागर हो जाने का डर
यही वे डर हैं जिनसे सोनिया या राहुल भागते रहे हैं !
और जो व्यक्ति अपने बचकाने डरो से भागे वो कैसे किसी का नेतृत्व कैसे कर सकता है ?
नेतृत्व करने की प्रथम प्राथमिकताओं से जिसे डर लगे वह देश का सबसे बड़ा नेता कैसे हो सकता है ?
कांग्रेस मुक्त भारत की सोच नयी नहीं है - इस सोच को अमली जामाँ पहनाने में सबसे पहला प्रयास "NTR" ने किया और तमिलनाडु को करीब करीब कांग्रेस मुक्त कर दिया !!
ऐसा ही कुछ ममता बनर्जी ने किया - ममता ने आज के राष्ट्रपति प्रणब दा के खिलाफ झंडा उठाया और कांग्रेस ने और प्रथम परिवार ने उस पर ध्यान नहीं दिया - बस १९९७ में कांग्रेस का तृण मूल एकत्र हुआ और फूल और फल को उसने बंगाल से बाहर कर दिया, उस फूल और फल को जिसका पोषण खुद त्रण और मूल करते थे -
और नयी पार्टी बना डाली जिसका नाम रखा गया
"त्रण मूल कांग्रेस"
इसका शाब्दिक अर्थ था
घाँस/पत्ते और जड़ वाली कांग्रेस -
इस टी एम सी ने फल और फूल वाली कांग्रेस को बाहर कर दिया जिसका पोषण जड़ और पत्ते मतलब कार्यकर्ता करते थे - बंगाल नया कांग्रेस मुक्त प्रदेश बना !
ऐसा ही नारायण दत्त तिवारी के साथ हुआ उत्तर प्रदेश में और यही आंध्र में वाई एस आर के साथ हुआ !!
यही हो रहा है हर उस प्रदेश में जहाँ पार्टी की मूल (जड़) मज़बूत है और ऐसे क्षत्रप नेता है जिनकी जनता रुपी धरती पर पकड़ है !
पार्टी के प्रथम परिवार को कोई भी क्षत्रप मंजूर नहीं जो अपने दम पर वोट पा सके उन्हें लगता है की देश उन्हें इंदिरा और राजीव के नाम पर वोट देता है !
और पार्टी में कोई क्षत्रप होगा तो उससे प्रथम परिवार को चुनौती मिलेगी-
प्रथम परिवार को चिंतन करना चाहिए कि, जनता ने और कार्यकर्ताओं ने तो इंदिरा और राजीव को भी आइना दिखाया है !!
आज की परिस्तिथि में जनता कांग्रेस से इतनी दुखी नहीं है जितनी सोनिया राहुल और उनके संगी साथियों से है !
दिग्विजय से लेकर तेवारी तक, खुर्शीद, चिदंबरम और राहुल तक जितने भी कांग्रेस के स्पोक्स पर्सन दिखते और छपते रहे है सब से जनता हठधर्मिता की हद तक चिढ़ी हुयी है पर आज भी मनमोहन सिंह के लिए जनता के मन में कोई तीव्र अनादर की भावना नहीं है !
आज कांग्रेस के त्रण मूल कार्यकर्ता को चाहिए की वह अपना स्वयं का नेता खुद चुने और ऐसे नेताओं से मुक्ति पाएं जो हवेलियों के अंदर से राजनीति करते हैं !
आज जरूरत है फिर उस सोच और हिम्मत की जो इंदिरा के पास थी !!
आज जनता नहीं चाहती की हमें वो लोग नेतृत्व दे जिनमे खुद छाती ठोंक के बात करने का माद्दा नहीं है !!
आज जरूरत है पूरे देश में कांग्रेस के क्षत्रपों को एकत्र करने की और एक बिलकुल नयी पार्टी खड़ा करने की !!
जिसमे देश के कद्दावर क्षेत्रीय जननायक हों जो हर उम्र,धर्म और जाति का नेतृत्व करें और जो संकल्प ले की वे मजबूर जनता और मानव मात्र के लिए काम करेंगे देश के लिए काम करेंगे न की तुष्टिकरण और निजी लाभ एवं किसी परिवार ऐ ख़ास के लिए !!
तो शायद कांग्रेस फिर पुराणी प्रतिष्ठा पा सके और उन युवा और अधेड़ कोंग्रेसियो का भविष्य उज्जवल हो जाए जो दशकों से संघर्षरत हैं !!
धन्यवाद
अवस्थी सचिन "जबलपुर"
९३०००३०९०३ / ८९८९४२८८१९

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बीजेपी हिन्दू वादी तो क्या कांग्रेस मुस्लिम वादी

चलो मान लिया बीजेपी हिंदूवादी पार्टी है !
बीजेपी सांप्रदायिक और आपकी नज़र के हिसाब से फासिस्ट पार्टी भी है !
मोदी शहंशाह हैं, ये भी मान लेते हैं, हत्यारा भी मान लेते हैं और जो कहो सब मान लेते हैं !!
पर आप बताओ आप क्या हो ?
इशरत एनकाउंटर भी सच साबित हुआ।
बाटला एनकाउंटर भी सच साबित हुआ।
अब बाकायदा जांच के बाद साबित हुआ कि फ्रिज में गाय का मांस ही था। शायद इसीलिए परिवार वाले सीबीआई जांच से मुकर गये थे।
खैर उपरोक्त तीनों घटनाओं को झूठा साबित करने की कोशिश की गई। किसलिए वोटों के लिये। वोटबैंक के लिये? ये लोकतंत्र है?
पर मेरा प्रश्न भी सुन लेते और उत्तर दे देते तो बड़ी कृपा होती ?
क्या आप हिन्दू विरोधी पार्टी नहीं हो ?
क्या आप वोटों के लिए फासिज़्म नहीं फैला रहे ?
अमित शाह कहते हैं अखलाक को जान से मार देना कहीं से भी न्याय संगत नहीं था।
पर क्या सैकड़ो सिक्खो की हत्या के बाद *किसी* ने कहा था, की जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है ?
खैर यह भी छोटी सी बात है - बड़ी बात यह है की आपको हिंदी नहीं आती तो इतने बड़े बड़े शब्द आपके मुंह में ठूंसता कौन है ?
वो कौन है जो आपको यह समझाता है की जो आप बोलेंगी वो जनता अक्षरशः मान लेगी प्रतिप्रश्न नहीं करेगी ?
वो आपका कौनसा महान सलाहकार है जो आपको राजमाता दिखने और आपके पुत्र को दीन हीन दिखने मजबूर कर देता है ?
कौन है जो आपसे मोदी को हत्यारा कहलवाकर, बीजेपी को फायदा दिलवाता है ?
मोदी या आरएसएस में ७६०० बुराई हैं - पर आप टारगेट उसी बुराई को करते हो - जिसे आपने कभी गर्व के साथ प्रचारित कर के किया था ?
एक छोटी सी बात और आप चिंता न करें - अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब आपका सम्पूर्ण मान मर्दन हो चूका होगा और फिर आपको कृष्ण जन्म भूमि में शिफ्ट
कर दिया जायेगा !!
मुस्लिम आपके साथ अब है ही नहीं और जो हिन्दू बचे हैं वे भी आपके बयानों से आज़िज़ आ गए हैं !!
ये सच है की हिन्दुस्तान त्वरित फायदा देखता है पर यह शास्वत सत्य है की हिंदुस्तान ने जिसे नज़रो से गिरा दिया उसको तब तक खड़ा होने नहीं दिया जब तक उससे भयंकर तपस्या नहीं करवा ली !!
चलिए बहुत हुआ मेरी यह कामना शुरू से रही है की देश में २ राष्ट्रिय पार्टियां जीवित रहे ; पर लगता है ईश्वर मेरी आजकल सुन नहीं रहा है !!

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