मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

संविधान और धर्म 🙏

चलो राजनीति से समाज शास्त्र पर आते है ।।

हम बदल क्यों रहे है?
प्रश्न अति महत्वपूर्ण है।
1 पीढ़ी पहले तक- जब विश्वविद्यालय में झगड़ा होता था तो कोई लड़का दूसरे को कहता था, भाई मेरी 1 बहन है उसकी शादी न करनी होती तो साले को पटक के खुखरी पेल देता।
मेरी इस हरकत से बहन की शादी में समस्या न आती तो मैं भी देख लेता उसे ।
2 पीढ़ी पहले सरकारी बाबू बोलता था - अगर परलोक की चिंता न होती - तो मैं भी भ्रष्ट होता और 50 बीघे का मालिक होता ।
इसी पीढ़ी में कई भ्रष्टाचारियो की बिटियों और बेटो की अच्छे घरों में शादी न हो सकी ।
चाचा शराबी हो झगड़ालू हो तो लोग उस खानदान के लोगो को काम नहीं देते थे।
बुरी आदतों या धोखे आदि के लिए लोगो का कई बार हुक्का पानी बन्द हुआ।
अच्छे आचरण वालो को समाज सम्मान देता था।

यह तो हुयी पुरानी बात अब आज की बात :
अगर कोई अति भ्रष्ट है तो लोग उसे चतुर कहते हैं, कोई भ्रष्टाचार में पकड़ा जाए तो लोग उस घर में बेटी ब्याहने में कोई संकोच नहीं करते।
गुंडे मवालीयो से संपर्क आपके गुणी होने का पहला प्रशस्तिपत्र है।
वर वधू के भाई परिवार या कुटुंब के आचरण से हमें कोई लेना देना नहीं, लेना देना है तो सिर्फ वर/वधु से, बाकी जाएँ तेल लेने ।
नौकर सभी को वफादार चाहिए, पर वह योग्य तब माना जायेगा जब दूसरो को धोखा दे कर आपका घर भरे।
और उस पर तुर्रा यह की वह आपसे धोखा न करे ।

आज आप सम्मानित और पुरुस्कृत लोगो को देख उन्हें किसी का चमचा कहते है तो कोई कहीं उन्हें जुगाड़ू की पदवी देता हैं।

मतलब ठग सारे बिना पुरुस्कार और प्रशस्तिपत्र पाये, सम्मानित महानुभाव हो गए और जिन्हें सरकार ने पुरूस्कार दिया उन्हें हम भ्रस्ट मानने लगे।

यह हुआ क्यों?
यह हो क्यों रहा है ?

कारण सिर्फ 1 है वह है समूची भारतीय संस्कृति पर सोच समझ कर किया गया विदेशी हमला ।

संयुक्त परिवारों और सामाजिक विघटन के लिए लाये गए क़ानून इसके दोषी हैं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों से इतर व्यक्ति आधारित जवाब देहि को सरकारी एवं न्यायिक प्रश्रय इसका कारण है।
आदर्शो और संघर्षो से पायी गयी सफलता कि जगह किसी भी तरह सफलता पाने के सिद्धांत को प्रश्रय देना इसका कारण है ।

विचारे यह हमें हुआ क्या?
संविधान लागू होने से पहले के भारत और आज के भारत के चरित्र में इतना फर्क क्यों ?
यह प्रश्न तार्किक है उत्तर खोजने की तहे दिल से कोशिश हो, यही आशा है ।।

#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

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बुधवार, 19 दिसंबर 2018

तीन राज्यों की हार और भाजपा

@amitshah कहते हैं कि अगला चुनाव हम युद्ध की तरह लडेंगे।
जबकि 11 दिसम्बर के पहले मोटा भाई विरोधीयों को कुछ मानने ही तैयार न थे?
प्रश्न यह कभी न था कि अटल सरकार भ्रष्ट थी, न ही यह प्रश्न आज उठता है कि मोदी सरकार भ्रष्ट है।
प्रश्न सिर्फ यह है कि आप डरते हो और जनता को मूर्ख समझते हो।
1- आपको चुनाव में हारने का डर है इसलिए संघ की विचारधारा को किनारे कर देते हो, जबकि आप जानते हो कि इसी विचारधारा ने आपकी सरकार बनवाई है।
2- आप पूर्ण बहुमत की सरकार चलाते हुए भी डरते हो, राम मंदिर धारा 370 पर बिल लाने से डरते हो।
3- आपको अपने वोटर के स्वार्थ की चिंता नही है आप उन्हें "taken for granted" लेते हो, आप दूसरों के वोटर झपटने के लिए लालची हो।
4- आप इतिहास से कुछ नहीं सीखना चाहते, क्या जनसंघ से लेकर अटल सरकार तक आपने हर हार का विवेचन नहीं किया है?
5- क्या शाहबानो से लेकर राम भक्तो पर गोली चलाने तक के एपिसोड पर आपकी पार्टी के स्टैंड आपको नहीं मालूम हैं?
6- क्या वी पी सिंह की पार्टी और खुद VP के हाल आपसे छुपे हैं?
7- क्या आप समझते हैं कि सोशल मीडिया के इस जमाने मे आपको आपके विरोधी छोड़ देंगे।
8- मतदाता के अंतर्मन की समझ ही तो संघ की पहचान है, क्या संघ को रमन और शिवराज के भ्रष्टाचार और शिवराज और रानी का दम्भ नहीं दिख रहा था?
9- राष्ट्रवाद के लिए और भ्रष्टाचार के खिलाफ देश ने एटीएम के सामने लाइने लगाईं।
व्यापारियों ने #टैली नामक सॉफ्टवेयर खरीदा, सुनारों ने सोने पर टैक्स बर्दाश्त किया, तो वे इसके सुखद परिणाम चाहते थे।
वे चाहते थे कि वे लोग जेल के पीछे हों जिन्होंने काला धन छुपाया है, पर हुआ क्या?
ढाक के तीन पात ।
10- आप राम मंदिर पर कोर्ट का फैसला आने का इंतज़ार कर रहे हो और जल्लीकट्टू पर संसद में अध्यादेश ले आते हो?
क्या हमारे श्री राम बैल से भी गए गुजरे हैं?
कुछ तो शर्म करो?
11- धारा 370 और कॉमन सिविल कोड पर आपकी चुप्पी क्या जनता को समझ नही आती?
12- आप ही बताये कि, संघ के बिठाए पर्यवेक्षक, संगठन मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय में बैठे संघ के लोगो को खरीदने या चुप कराने से आपको 2018 में क्या हासिल हुआ? और जनता 2019 में आपको इन्ही कारगुजारियों के लिए क्या देगी ?
2018 में 3 राज्य हाँथ से गये अब 2019 की बारी है।
13- अगर 2 बेहतरीन सेलिब्रिटी SC ST एक्ट में जेल चले जाएं और इस एक्ट के प्रावधान जनता के सामने आ जाए तो यह तय मानिये SC ST समुदाय के साथ साथ 78%सवर्ण आपको ऐसी जगह ले जाकर छोड़ेगा की भाजपा भी जनता दल हो जाएगी।
14- माया के लोग माया के ही रहते हैं वे खत्म हो जाएंगे पर भटकेंगे नहीं, पर आपके स्वर्ण, व्यापारी और मध्यम वर्गीय वोटर आपको छोड़ निर्दलीय या किसी के भी पाले में चल देंगे और आपको हवा भी न लगेगी।
15- मोटा भाई, इस देश मे जाति, वर्ग और धर्म के हिसाब से लोग प्रतिक्रिया देते हैं,
व्यापारी,ठेकेदार सवर्ण रेल नहीं रोकता, बस नही जलाता वह वोट देता है वह भी बिना चेताये।
इन्होंने 1989 में VP सिंह को वोट दिया था 2014 में आपको भी दिया था।
पर दूसरी, तीसरी और चौथी बार वी पी वोट मांगने के काबिल ही नहीं बचे।
दलित बसपा के ही रहे पर सवर्ण वी पी के न रहे। 🤣
न ही कोई ओबीसी या सवर्ण उन्हें याद करता है न ही दलित उनको याद रखना चाहता है।
#वी_पी_सिंह एक फ्लॉप कहानी हो गए 🤣
अभी भी चेत जाओ, अन्यथा आपका जय श्रीराम होते देर न लगेगी 🤣🤣🤣

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गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

हम बेवकूफो को आदर्श नहीं मान सकते पर हम बेवकूफ हैं; 🤣

चलिए आध्यात्म, मानवीयता और भारतीयता पर लौटें ।
"हम बेवकूफो को आदर्श नहीं मान सकते और हमें कोई स्वार्थी कहे ऐसी किसमें मजाल है? "
यही भारतीय सिविलाइजेशन का मूल है, #छुट्टन_गुरु

#लल्लन_महाराज - कैसे ?🙄
मै -
कुछ चीज़े हैं ; जो भारतीय समाज को पश्चिमी समाज से अलग करती हैं !
१- आदर्शवाद
२- त्याग
३- निस्वार्थ कर्म
४- सहिष्णुता
पंगा इन्ही चीज़ों में फंसता है ; आज पश्चिमी या अभारतीय दर्शन कहता है ; कि आदर्शवाद जब जरूरी है जब हमें फायदा हो ;
जीवन सिर्फ निजी फायदे के लिए है , अगर फायदा नही तो मतलब क्या ?
लाभ ही तो सब कुछ है, BY HOOK OR CROOK...

यही सोच संकुचित हो कर "मैं" में सिमट चली है और उतरोतर अहंकारी होती जाती है !!
और भारतीय दर्शन कहता है कि अहंकार तो रावण का भी न चला...
हम कहने लगे हैं -
आदर्शवाद बढ़िया है पर दूसरों के लिए !!
जब हमारी बात आती है तो कोई रास्ता बहाना खोज लिया जाता है, कि हम उससे बच सके।
त्याग दूसरे करें हम तो अधिकार के लिए लड़ेंगे।
#छुट्टन_गुरु : हम निस्वार्थ क्यों हो ?
निस्वार्थ कर्म : ये क्या होता है ? चाणक्य ने कहा था कि बिना लाभ के कोई काम नहीं करता, जो करता है वो मूर्ख है और अलाभकारी है, बेवकूफ है !! 😂😂😂
#मैं - यहाँ भी सुविधा ही देखी तुमने #छुट्टन। 😂😂😂
भाई ये भी तो सोच सकते हो कि चाणक्य को  क्या लाभ था?
उसने विष्णुगुप्त को गद्दी दी सम्राट बनाया और खुद झोपड़ी में रहा ; क्यों ?
विष्णुगुप्त रेशम, स्वर्णाभूषण पहनता था, विलास करता था,
और चाणक्य सूत पहनता था और मूँज पे सोता था। यही तो #ब्राह्मणत्व था...
#लल्लन_महाराज 😏 उफ्फ अच्छा बताओ सहिष्णुता क्या होती है?
क्या यह बेवकूफी नहीं है, ये कायरता नही है ; ताकतवर बनो ; निष्ठुर बनो तभी राज करोगे - सत्ता बन्दूक की नाल से निकलती है !!
मुगलों से लेकर अंग्रेज़ों ने सत्ता को तोप की नाल से निकाला है !!
#मैं : हम्म
कभी कभी ये बातें आकर्षित करती हैं क्योंकि ये शॉर्टकट्स हैं ; परपीड़ा हमेशा आनंदायी होती है !!
आत्म पीड़ा, आत्मावलोकन  दुःख देता है और पश्चिमी समाज सुविधा भोगी है !!

वहीँ भारतीय समाज का अध्यात्म है - जिससे आप सहिष्णुता, त्याग और निस्वार्थ कर्म पर किसी से भी निम्नलिखित प्रश्न करो और उसके उत्तर आपको हर व्यक्ति यही देगा जो नीचे दिए हैं-
प्रश्न भी सुन लो...
१- आज तक सबसे अच्छा राजनीतिज्ञ कौन हुआ ?
वो कहेगा चाणक्य।
२- आप फिर पूछो इतिहास में सबसे अच्छा राजा कौन हुआ ?
वो कहेगा राम।
३- सबसे  ताकतवर राजा कौन था ?
वो बोलेगा अशोक ?
४- सबसे अच्छा राजा कौन ?
हरिश्चन्द 
५- सबसे बड़ा जनांदोलन ?
स्वतंत्रता संग्राम।
६- सबसे बड़ा आंदोलनकारी ?
गांधी।
७- सबसे अच्छा प्रधानमंत्री ?
शास्त्री।
८- सबसे अच्छा राष्ट्रपति ?
कलाम।

इन ८ लोगो में समानता क्या है ?
वही चार बातें जो मैंने ऊपर लिखी हैं !!
१- आदर्शवाद
२- त्याग
३- निस्वार्थ कर्म
४- सहिष्णुता
पर इन ४ बातों को तो हम बेवकूफी मानते हैं ; और इन बातों पर चलने वाले हमारे आदर्श हैं ; ऐसा क्यों ?
क्या हम दिग्भ्रमित नहीं हैं?
हम बेवकूफो को आदर्श नहीं मान सकते और हमें कोई बेवकूफ कहे ऐसी किसमें मजाल है ?
हम होशियार हैं और लगातार ज्यादा होशियार बनने की जुगत में हैं !!

पर अपनी भारतीयता और अपना दर्शन छोड़कर क्या हम महान हो सकते हैं ?
विचारो #लल्लन_महाराज #विचारो

हम लोगों को समझ सको तो समझो दिलबर जानी.......... 🤣🤣🤣
#हथौड़ा_पोस्ट
#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज
और हम चल दिये 😊

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रविवार, 2 दिसंबर 2018

भारतीयता और पश्चिम...

हिन्दोस्तान की जिसे समझ है, वह जानता है कि इस देश ने अंगुलिमाल को सन्त स्वीकारा है, रावण को हम हर वर्ष जलाते हैं पर उसे प्रकांड पण्डित भी मानते है और रावण रचित शिव तांडव स्त्रोत्र का पाठ भी करते हैं पर राम भक्त विभीषण जिसे लंका का राज्य मिला उसका नाम आज भी धोखे के प्रतीक के रूप में उपयोग करते हैं, कोई अपने बच्चे का नाम विभीषण नही रखता न रावण रखता है, पर रावण के पांडित्य का सम्मान जरूर करता है।
सिद्धार्थ, अशोक जैसे नाम आपको खूब मिलेंगे, अशोक निरा हत्यारा था पर बाद में बदल गया।
गांधी का पारिवारिक जीवन बहुत बुरा था बल्कि आप कह सकते है कि गांधी पत्नी उत्पीड़क और हृदयहीन पिता थे, पर लोग उन्हें आदर्श मानते हैं।
भारतीय परंपराओं में छुप के अपराध करना (कुटिलता) स्वीकार नही है।
वह कार्य तो बिल्कुल स्वीकार्य नही जो आपकी अंतरात्मा स्वीकार न करे।
आचार्य श्रीराम शर्मा ने कहा है जो तुम्हे खुद पसंद न हो वह दूसरो के साथ न करो।
यही तो भारतीयता है, यही तो है हमारा #डीएनए
रिसर्चर्स कहते हैं कि हमारी मजबूत यादे हमारे डीएनए में पैबस्त हो जाती हैं,
हमारे पूर्वजो के गुण हम में होते ही हैं, वे झलकते हैं हमारे काम करने के तरीको में।
इन गुणों को हमारा दिमाग, हमारी जरूरते और कार्य की मांग बदलते (सप्रेस करते) हैं, पर हमारा मूल नही बदलता,
ऐसे ही भारतीयता के मूल में आदर्श हैं, प्रेम है दया है।
जरा जरा सी बात पर लंगर लगाते हिंदुस्तानी आपको दुनिया में हर जगह मिलेंगे।
दूसरो की तकलीफो को दूर करने के लिए अपने उसूलो को तोड़ता हुआ हिंदुस्तानी आपको पूरी दुनिया में मिलेगा।
#रॉबर्ट_ग्रीन के 48 नियम पढ़ कर निकले इन युवाओ के आदर्शो (पिचाई, नूयी, नाडाल) से पूछिये, कि यही रोबर्ट ग्रीन को पूरी दुनिया ने पढ़ा है पर पिचाई से लेकर नाडाल तक में ऐसा क्या है जो बड़ीअमेरिकी कम्पनियो के मालिक भारतीयों को अपनी कम्पनी सौंप रहे हैं।
इस देश में ऐसा क्या है जो स्टीव जॉब्स और जूलिया रोबर्ट को आकर्षित करता है?
क्या कारण है कि कनाडा पर पंजाबीयो का कब्जा सा हो गया है और वह भी प्रेम से, बिना किसी झगड़े और झंझट के और फिर भी पंजाबी पंजाब को ही अपना देश मानते है?
यही वह चीजे हैं जो हमे सोचने को मजबूर करती हैं की हम हैं क्या?
सोचिये - #विभीषण एक भ्रातद्रोही ने ईश्वर #राम की मदद की पर वह हमारे लिए तजात्य है?
वाल्मीकि (जो जघन्य अपराधी थे) ने एक किताब लिखी और पूज्य हो गए?
पृथ्वीराज हार कर, मर कर भी अमर है और विजेता को कोई नही पूछता।
यह रोबर्ट ग्रीन और तुलसीदास का फर्क है, रॉबर्ट जंगल के कानून को परिष्कृत करने की जुगत में हैं और तुलसीदास जंगल को समाज बनाने के लिए आदर्शो को महिमामण्डित कर रहे हैं,
वहीं गीता में कृष्ण कहते है "वीरम भोग्ये वसुंधरा"
और फिर बात आती है "सबै भूमि गोपाल की"
अंग्रेज़ कहते हैं, इतना कंफ्यूशन उफ्फ ?
पर यह भारतीय समझता है कि इन दोनों विरोधाभासों के पीछे का उद्देश्य स्वच्छ समाज बनाने की कोशिश है।
पश्चिम का यह समझना असम्भव है क्योंकि उनके लिए आदर्श, प्रेम, सहकार और परिवार मायने नहीं रखते उनके लिए #जीत ताकत और सत्ता मायने रखती है।
वर्तमान राजनीति की बात करें तो यही फर्क है, वामपंथ और दक्षिण पन्थ की सोच में,
वामपंथी प्रश्नों से आपको उद्वेलित करता है और दक्षिणपंथ आपको आदर्शो की बात करता है।
पश्चिम आपको अपने अधिकारो के प्रति जाग्रत करता है, पर कर्तव्य भुला देता है, जिससे गुस्सा, घृणा बंदूके, ताकत का गलत उपयोग समाज में प्रभावी हो जाते हैं।
जबकि भारत सिखाता है #कर्तव्यों को,
पूरा समाज अगर अपने कर्तव्य करता चले तो अधिकार मांगने की जरूरत किसको है?
हमारे समाज में भूख प्यास और ठंड से आपको बचाने पूरा देश खड़ा है, पर पश्चिम में लोग अपने बाप के साथ भी नहीं खड़े होते।
वे पैसे के साथ खड़े होते हैं, ताकत के साथ खड़े होते है, भाई, बहन, मां, बाप और मित्रो के साथ नहीं।
यही कुछ है जो हज़ारो सालो से हम में नही बदला है और इसीलिए हम आज भी हम हैं 🙏
#अलख_निरंजन
#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

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राजनीति और आदर्शों का घालमेल


#मोदी_शाह_और_आरएसएस

2 साल पुरानी पोस्ट ....
1- राजनीति में कभी कुछ भी सही तरीके से किया ही नही जा सकता ।
आदर्शवादी तरीके से राजनीति असम्भव है।
विरोधी को छकाना, भ्रमित करना और उसे वस्तु स्तिथि से अवगत होने से पहले जमीन सुंघा देना ही तो राजनीति है, बल्कि यही जीवन है।
2- अगर आप विरोधी की अगली चाल भांप लेते हैं तो आप विश्वविजेता हो सकते हैं।
अगर आप विरोधी के चाल चलने के पश्चात उसका तोड़ सोच लेते हैं तो आप विजेता हैं पर अगर आप विरोधी की चाल नही समझ पाते या उसे गम्भीरता से नही लेते तो आप हारने के लिए ही पैदा हुए हैं ।।
3- राजनीति में अच्छे उद्देश्य के लिए गलत तरीके स्तेमाल करना मजबूरी है, पर वह तरीके अगर सार्वजनिक हो जाये तो यह अज्ञानता कहलाएगी।
नेता/राजा और जनता/प्रजा दो अलग अलग स्तर के दिमाग होते हैं।
पहला दिमाग वह जो अपने महान उद्देश्य के लिए हर कोशिश करता रहे पर दूसरा वह ही देख पाता है जो उसे पहला दिखाये।
4- नेता या राजा कभी 1 विजय से महान नही कहलाता उसे सैकड़ो छोटी छोटी जीतो का गुलदस्ता बनाना होता है जिसे बाद में जनता या प्रजा खुद सभी जीतो को सम्मलित मान महान कहने लगती है।
यही हो रहा है - 1- थरूर के विदेशी सम्बन्धो का उपयोग मोदी विरोध में न हो इसलिए थरूर को सुनंदा के मामले में व्यस्त किया गया।
2-लालू के अहमकाना अंदाज़ का फायदा विरोधियो को न मिले इसलिए लालू को टांगा गया।
3- विपक्षियो में भय का संचार हो इसलिए शिवकुमार और अहमद पटेल को झंकझोर के छोड़ दिया गया।
4- मुलायम हो या शरद पवार सब सनाके मे हैं।
5- जे एन यू, कश्मीरी पंडित , डॉ नारंग और अखलाख मामले से कश्मीर, कैराना और ममता के बंगाल में माहौल बनाया गया ।।
6- अहमद पटेल के चुनाव की आड़ में 7 एम एल सी यू पी में तोड़ दिए गए।
7- केजरीवाल के पीछे माहौल बनाते बनाते दिल्ली को कांग्रेस विहीन कर दिया गया।
कॉंग्रेस के पास दिल्ली में यदि कोई सबसे बड़ा संवैधानिक पद है तो वह है पार्षद का।।
बिल्कुल वही हो रहा है जो दंगल फ़िल्म की आखिरी कुश्ती के आखिरी 1 मिनिट में हुआ था।
अब मोदी को भ्रष्टाचार के आरोप में किसी अपने को शहीद करना है, यह अति सम्भव है।।
सतर्क रहें,
अगस्त के महीने की #स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महराज की #हथौड़ा_पोस्ट

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सोशल मीडिया और पुरानी सोच...

#सोशल_मीडिया
बुजुर्ग सोच के लोग जिन्हें लगता है कि सोशल मीडिया खेल है कुछ गलत लिख भी दिया तो जनता कुछ समय में भूल जाएगी ऐसे लोगों का अवसान तय है, लालू परिवार उनमे से 1 है।
मुलायम बचे रह सकते हैं, वे समझदार है पर यह उनका यह विपरीत समय है, नीतीश उत्तरोत्तर तरक्की करगें पर केजरी, ममता और लालू का अवसान तय है ।।
राहुल का पराभाव तय है और प्रियंका शायद वापसी कर लें अगर राहुल पूर्व की तरह वाड्रा के पीछे न पड़ें तो ।।
नेताओ सेलिब्रिटी और महत्वपूर्ण लोगो को तुरंत के गोल दिखते हैं, वे उन्हें अचीव करने के लिए तुरन्त जागते है और उन्हें अचीव करने के बाद सो जाते हैं, इसमे कॉन्ट्रोवर्सी से पायी गयी प्रतिष्ठा के लिए, जघन्य गलतियां सामान्य बात हैं, पर जब वही गलतियें और बयान पीछे पड़ते हैं तो राहुल को जनेऊ धारू ऊप्स धरी हिन्दू बनना पड़ता है।
सोशल मीडिया 1948 के सोमनाथ मन्दिर पर नेहरू के विरोध को खींच लाता है तो राहुल के लड़की छेड़ने के बयान की क्या बिसात है।
व्यवस्थाएं और संस्कार वही होते है जो हमारे डीएनए में हैं।
25 साल लगे कांग्रेस को धर्मनिरपेक्षता शब्द संविधान में घुसेड़ने में पर 40 सालो में इस शब्द को वह जनमानस के मन के अंदर न घुसेड़ पायी।
नेहरूवियन मतलब धर्मनिरपेक्षता + साम्यवाद 70 साल बाद खारिज हो रहा है पर
गांधी के रामराज्य की कोई काट नही है न ही सरदार पटेल के राष्ट्रवाद की।
इंदिरा का हिंदुत्व आरएसएस के हिंदुत्व से बड़ा था। इंदिरा के हिंदुत्व की काट करने में आरएसएस को दांतों तले पसीना आ सकता है।
इंदिरा का नारा "जात पर न पांत पर मोहर लगेगी हाँथ पर",
"सबका साथ सबका विकास" नारे से हमेशा बड़ा रहेगा।
पर शिंदे का हिन्दू आतंकवाद का नारा नेहरूवियन सोच और कांग्रेसी सोच से बड़ा हो गया और इसीलिए कांग्रेस खत्म होने की कगार पर है।
इन हिंदुत्व की मानसिकता विरोधियो (मैं सनातनियो की बात नही कर रहा) को खत्म करने और हमारे डीएनए को जाग्रत करने का काम #SocialMedia ने किया है।
अगर #सोशल #मीडिया न होता तो मोदी और ट्रम्प न होते।
सोशल मीडिया न होता तो नवाज़ पदच्युत न होते।
सोशल मीडिया न होता तो हाफिज सईद पाकिस्तान में राजनैतिक पार्टी बनाने का स्वप्न न देखता।
और न ही प्रातः जुटनीय केजरीवाल जी दिल्ली में 95.71% सीट कब्जा पाते।
इन सबने सोशल मीडिया का या तो फायदा उठाया है या भोगा है।
1- भावनाओ को समझना उसे उद्वेलित करना और वोट में बदलना कला है।
2- नोटेबन्दी GST मुद्दे थे पर भावनाये उसके विपरीत थी, इस बात को समझना सबके बस की बात नहीं ।
3- ओसामा जी और सईद साहब दिग्गी की भावनाये थी पर जनता का मुद्दा आतंकवाद और भ्रस्टाचार था तो उत्तर प्रदेश (गांधियों और मोदी विरोधियो के गृह राज्य) की मुस्लिम बहुल सीटें भी बीजेपी ने जीती ।
नोट: समस्या यह है कि आप, सपा, बसपा या कांग्रेस, किसी मे भी विविध विचारो को पार्टी मंच पर रखने की आजादी नही है।
इन पार्टियों में कोई कमेटी ऐसी नही जिसमे एक भी बंदा ऐसा हो जिसके खून में चाटुकारिता न हो, जिसे स्वलाभः के अलावा विचारधारा या लक्ष्य से कोई लेना देना हो।
बस यही लोग हैं जो #PIDI को रिट्वीट करते हैं।
यही लोग हैं जो अपने नेता को खुश करने के लिए उनकी गलती को भी सही बताने में लगे रहते हैं।
जबकि बीजेपी के सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स नेताओ के ट्वीट की जगह विचारधारा पर चोट करते हैं।
मज़ाक बनाते है।
गम्भीर बातो को हवा में उड़ा देते हैं।
कम गंभीर बातो को कांग्रेस की टीम के साथ मिलकर प्रोमोट करते हैं और फिर शाम तक उसकी हवा निकाल देते हैं।
यही है #SocialMedia इसमे अगर दूरगामी लक्ष्य, मानवीय भावनाओ और खुला दिमाग आपके पास नही है तो आपका उलझना तय है।
यह वह तालाब है जिसमे आप छोटी छोटी मछली पकड़ रहे है और आपके गल को यकायक मगरमच्छ निगल ले और आप अगले सेकंड मगर के सामने होंगे।
सोशल मीडिया में एक शब्द बड़ा कॉमन है #भक्त ।
आप भक्तो को भक्त न माने ये वह अनुयायी है जिनके नबी के खिलाफ एक शब्द भी अगर किसी के मुंह से निकल जाए तो वे अमेरिका में बैठ कर भी वैसे ही नबी विरोधी विचारधारा को निपटा देंगें, जैसे चार्ली हेब्दो को निपटाया था ।।
ये सोशल मीडिया है #जानी यह #कुरुक्षेत्र का वह मैदान है जहां 24x7 365 दिन युद्ध लड़ा जा रहा है।
और एक पक्ष कैडर और वैचारिक प्रतिबद्धता से युक्त है और दूसरा चाटुकारिता से धन और ताकत प्राप्ति में भिड़ा हुआ है।
आप विचारें कौन है इनकी टक्कर में ।।
ॐ शांति
#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज
#हथौड़ा_पोस्ट

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