शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

राजनीति और धर्म Vs नेता और धर्मगुरु


अंग्रेज़ो को न तो धर्म गुरु पसंद थे न ही ब्राह्मण ।
अंग्रेज़ो ने 2 व्यवस्थाएं दीं, 
1- वैकल्पिक ब्राह्मण
2- वैकल्पिक धर्म गुरु
A- वैकल्पिक ब्राह्मणों का काम था, जातिगत ब्राह्मणों के समान न्याय करना और प्रशासन चलाना।
B- वैकल्पिक धर्मगुरुओ का काम था संसद को नेतृत्व देना ।

व्यवस्थाएं तो अंग्रेज़ो ने ठीक ही दी बस एक कमी रह गयी वह थी, ब्राह्मणों के समान आदर्श और बिना अर्थ लाभ के शासन चलाने के गुर वह वैकल्पिक समाज को न दे पाए।
और यहीं से शुरू हुआ, #भ्रष्टाचार #ताकत और #अनैतिकता का खेल ।।

संसद को नेतृत्व देने वाले (मंत्री परिषद और राष्ट्रपति) वैकल्पिक धर्म गुरु हो या प्रशासन चलाने या न्याय करने वाले वैकल्पिक ब्राह्मण, सभी 200% भ्रष्ट और काइयां है।
क्यूं?
कभी आपने सोचा ?
इसका सिर्फ एक ही कारण है कि अंग्रेज़ो ने इन वैकल्पिक सत्ताधारियो को अधिकार तो पूरे दिए पर, ब्राह्मणों के समान भिक्षा मांग के भोजन, कुटिया में चुटिया के साथ निवास, स्वर्ण और रथ के उपयोग पर पाबंदी एवम
शराब और मांस से परहेज के नियम नही बनाये।
बस यहीं से शुरू हुआ हमारा पतन।
वैकल्पिक ब्राह्मण (नेता, न्यायाधीश और अधिकारी) पर अगर आज भी जातिगत ब्राह्मण के समान भिक्षा से जीवन यापन का नियम लागू हो, 
एक ड्रेस कोड लागू हो कि वह मांस और मदिरा की दुकान पर न जा सके, उसका परिवार भूमि, रत्न और ऐश्वर्य का संचय न कर सके।
तो क्या भ्रष्टाचार और अनैतिकता समाज मे जिंदा रह पाएगी।
सोचिये,
अगर नेता, जज और अधिकारियों के लिए भिक्षा ही जीवन यापन का साधन हो तो क्या बोफोर्स, क्या अगस्ता वेस्ट लेंड और क्या कोलगेट सम्भव है?
भ्रस्टाचार की सीमा ज्यादा से ज्यादा 2 किलो अमरूद या 2 लीटर दूध रह जायेगी 😂😂😂
बस यही तरीका है अब भ्रष्टाचार और अनाचार उन्मूलन का।
क्या आप इस विचार के साथ है?
बताइयेगा जरूर 😂😂😂
#हथौड़ा_पोस्ट
#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

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शुक्रवार, 1 नवंबर 2019

चीन की न 🤔

चीन और उसकी "न" कहने की शक्ति !!

एक नयी बात और ऐसी भी की दिमाग जिंझोड दे !!

शक्ति चीज़ो को नकारने की आपकी क्षमता से परिभाषित होती है !

जैसा की शाश्वत सत्य है ; एक ५ किलो की वस्तु अपनी जगह पड़ी रहना चाहती है और आप उसकी इक्षा के विरुद्ध उसकी मंशा को नकारते हुए उसे  स्थान पर पदस्थापित कर दें तो ये आपकी ताकत हुयी !

किसी के न चाहते हुए भी उससे अपने मन का काम ले लेना "ताकत" है !

ये भूमिका आगे के लेख के सन्दर्भ में है !!

मैंने १ माह पहले एक सी डी एम ए मोबाइल का अधिग्रहण किया ; जैसा की  सब जानते हैं सी डी एम ए स्मार्ट फ़ोन वो भी ड्यूल सिम आसानी से मिलना मुश्किल है !

ये सेट चीनी कंपनी जेड टी ई का है जो मोबाइल के बी टी एस बनाती है !

आश्चर्य जनक रूप से इस सेट में ढेरों कमियां और दोष थे !

जी पी इस ठीक काम नहीं करता था ; जी एस एम सिम में सिग्नल की समस्या थी ; बैटरी कमजोर थी ;

मैंने इस मोबाइल के एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम को रुट करने का मन बनाया ; कुछ सुधर हुआ पर मैं संतुष्ट नहीं था ; काफी आर एंड डी के बाद मुझे एक चीनी (चाइना मोबाइल कंपनी) रोम मिली ; जब मैंने उसे इंस्टॉल किया तो मोबाइल चीनी भाषा बोलने और दिखाने लगा ; नए फॉण्ट डाले गए कुछ ट्वीक किये गए और अंत रिजल्ट ये आया की सेट मिट्टी से चांदी बन गया (सोना न हो पाया).

फिर देखा की गूगल प्ले स्टोर और प्ले सर्विस मिसबिहेव कर रही है ; उसे सुधारा तो पता चला चीन में  गूगल को लिमिटेड एक्सेस है इसलिए ऐसा हो रहा है !

बड़ा आश्चर्य हुआ : कि एक देश जो अंग्रेजी को जूते की नोक पर रखता है ; गूगल के लिए दरवाजे  बंद कर लेता है फिर भी अपना माल पूरी दुनिया में बेंचता है ; और जो माल दुनिया के दूसरे मुल्कों को बेंचता है वो दोयम दर्जे का होता है ; अपने लोगों के लिए चीन बेहतर सुविधा संपन्न गैजेट बनता है !

भारतीय मॉडल में ऑपरेटिंग सिस्टम से, चीनियों ने सेट को काफी लिमिटेड यूज़ के लिए ट्वीक किया था ; जबकि सेट के हार्डवेयर में वाई फाई ट्रांसफर और ग्लोबल मोड जैसे फीचर्स हैं , जो की भारतीय रोम में डिसएबल थे ; अब सेट में २ जी एस एम या १ सी डी एम ए और एक जी एस एम सिम चल सकेगी !
इनके अपने सर्च इंजन हैं अपने क्लाउड हैं ; इस मोबाइल पर २८ चीन के सॉफ्टवेयर मुझे अनइंस्टॉल करने पड़े !

आप विचार करें की अगर हमारे देश में सिर्फ हिंदी में काम हो ; गूगल न चले तो हम कहाँ  होंगे ?

निश्चित ही चीन से ५० साल पीछे होंगे !!

और निश्चित ही ये ताकत चीन को अपने समाज, भाषा और लोगों को शक्ति सम्पन बनाने से मिली है !

#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज