सोमवार, 29 जून 2009

कुछ अनोखा, कुछ रोमांचक...




भारत मेरा देश, प्यारा विविधता से भरा, विशिष्ट प्रजातियों का घर, जिन पर दुनिया भर की नज़रें रहती है. उनमे से एक प्रजाति है बड़ी और पट्टेदार बिल्ली की, जिसे हम सिंह (TIGER) कहते हैं. आज इनकी संख्या लगातार कम हो रही है. आज हमारे छत्तीसगढ़ मे, ये कितनी संख्या मे हैं ये वृहद चर्चा और विवाद का विषय है. पर हमसे कुछ हज़ार किलोमीटर दूर थाईलैंड मे जहाँ सिंह का मांस पौरुषवर्धक माना जाता है
वहां एक मठ मे इस बड़ी बिल्ली की संख्या और आचार विचार को देख कर मैं भौचक रह गया.
इस शानदार और गर्वीले जानवर को देख कर हर ताकतवर व्यक्ति इसको पालतू बनाना चाहता है, या इससे दोस्ती करने की तमन्ना रखता है. खुले जंगल मे इस बड़ी बिल्ली को देखना एक रोमांचक अनुभव होता है.
बैंकॉक के नज़दीक Wat Pa Luangta Bua Yanasampanno Forest Monastery,
जो Saiyok डिस्ट्रिक्ट, Kanchanaburi Province मे है. एक शानदार बौध मठ है. जहाँ इन बड़ी बिल्लिओं को देखना और इनके साथ खेलना बच्चों का काम है.
इस मठ को १९९९ मे ग्रामीणों ने शिकारिओं द्वारा एक घायल सिंह शावक प्रदान किया, जो कुछ समय बाद ईश्वर को प्यारा हो गया, इसके बाद घायल शावकों को मठ मे देने का परंपरा शुरू हो गयी. ये शावक धीरे धीरे बड़े होते गए और मठ के शांत वातावरण मे मनुष्यों के साथ हिल मिल गए,
१२ एकड़ के इस बौद्ध मठ मे अब इन शेरों को रखने की भी जगह नहीं बची है.
मठ अब इनके लिए नयी जगह खोज रहा है.
पर्यटन के लिए अधिक जानकारी, आपको मठ की इस वेब साईट से मिल सकती है.
http://www.tigertemple.org/Eng/
आज हमारे देश मे सिंह दुर्लभ होते जा रहे हैं सरकारे सिंह प्रजाति के संवर्धन मे करोडों रूपये खर्च कर रही है. वहीँ हमारे देश से कुछ हज़ार किलोमीटर दूर साधू संत बिना ज्यादा खर्च के इस प्रजाति का संवर्धन कर रहे हैं,
ये काबिल-ऐ- तारीफ है. आज ये मठ विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा जगह बनती जा रही है.
अगर आप इन शानदार बिल्लिओं के साथ घूमना और खेलना चाहते हैं, तों आपको थाईलैंड जाना होगा, बोद्ध मठ के शांत और अध्यात्मिक माहौल मे ये बिल्लियाँ आपकी जांघ पर सर रख कर सो जाएँगी, आप इनके साथ आलिंगनबद्ध हो सकते है. इन्हें प्यार कर सकते है, दुलार सकते हैं.
ये आपकी जिन्दगी का सबसे रोमांचक अनुभव हो सकता है. आपका एल्द्रेनिल सर्वोच्च शिखर को छू जायेगा. तैयारी कीजिये एक रोमांच से भरे हुए सफ़र की.
अवस्थी नमित ...

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रविवार, 21 जून 2009

कुछ शेर कुछ गज़ले...


कुछ शेर और गज़ले जो मुझे पसंद हैं...
शायद आप को भी पसंद आयें...

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,
मिल जाये तों मिटटी है खो जाये तों सोना है,
अच्छासा कोई मौसम तनहा सा कोई आलम,
हर वक़्त का रोना तों बेकार का रोना है,
बरसात का बादल तों दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है,
गम हो के ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं,
फिर रस्ता ही रस्ता है न हँसना है न रोना है,
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,

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जबसे हम तबाह हो गए, तुम जहाँपनाह हो गए II
हुस्न पर निखार आ गया, आईने स्याह हो गए II
आँधियों की कुछ खता नहीं, हम ही दर्द -ऐ- राह हो गए II
दुश्मनों को चिट्ठियाँ लिखो, दोस्त खैर ख्वाह हो गए II
जबसे हम तबाह हो गए, तुम जहाँपनाह हो गए II

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हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलूँ,
इधर से गुज़ारा था सोचा सलाम करता चलूँ,
निगाहों दिल की यही आख़िरी तमन्ना है,
तुम्हारी जुल्फ के साये मे शाम करता चलूँ,
उन्हें ये जिद कि मुझे देख कर किसी को न देख,
मेरा ये शौक कि सबसे कलाम करता चलूँ,
ये मेरे ख्वाबों की दुनिया नहीं सही लेकिन,
अब आ गया हूँ दो दिन कयाम करता चलूँ
हुज़ूर आपका भी एहतराम करता चलूँ,
इधर से गुज़ारा था सोचा सलाम करता चलूँ,

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तुम नहीं गम नहीं शराब नहीं, ऐसी तनहाई का ज़वाब नहीं,
गाहे ब गाहे इसे पढ़ा कीजे, दिल से बहतर कोई किताब नहीं,
जाने किस किस की मौत आई है, आज रुख पे कोई नकाब नहीं.
वो करम उंगलिओं पे गिनते हैं, जुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं,
ऐसी तन्हाई का ज़वाब नहीं....तुम नहीं गम नहीं शराब नहीं,

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दिल ही तों है न संग ओ खिश्त, दर्द से भर न जाये क्यों,
रोयेंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों,
दैर नहीं हरम नहीं दर नहीं आसमान नहीं
बैठे है रह गुज़र पे हम, गैर हमें उठाये क्यूं
हाँ वो नहीं खुदा परस्त, जाओ वो बे वफ़ा सही,
जिसको हो दीनो दिल अज़ीज़, उसकी गली मे जाये क्यों.
ग़ालिब इ खस्ता के बगैर कौनसे काम बंद हैं
रोइए जार जार क्या कीजिये हाय हाय क्यों,
दिल ही तों है न संग इ खिश्त, दर्द से भर न जाये क्यों,
रोयेंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों,

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