रविवार, 3 मार्च 2019

सनातन और जीवन

क्या कभी हम अपने गिरहबान में झांकेंगे?
सनातन : धर्म की व्याख्या है, धार्यति इति धर्म: मतलब जो धारण किया जाए वह धर्म।
तो हम धारण करते है, आचार, विचार और व्यवहार।
हम उसे बनाते हैं जीवन जीने का तरीका।
और इस तरीको को जितना व्यवस्थित, व्यवहारिक, वैज्ञानिक और जनोन्मुखी सनातन धर्म ने बनाया, उतना किसी धर्म ने नहीं बनाया, जितना पुराना यह धर्म है उतना कोई नहीं।
लोगों ने #रामायण पढ़ी #गीता पढ़ी, यह कुछ सौ या कुछ हजार साल पहले लिखी गयी।
आप वेद पढ़िए, आप उपनिषद पढ़िए।
आपको समझ आएगा कि एक व्यवस्थित समाज, दोषमुक्त समाज इन्ही वैदिक नियमो से निकल सकता है।
इन नियमो से जीवन इतना सरल हो सकता है कि सामान्य व्यक्ति सोच भी नहीं सकता।
इन नियमो में इतने फिल्टर हैं कि अपराध की हिम्मत जुटाना ही मुश्किल हो जाता है।
आप सोचें, अधिकारी के द्वारा किये गए गबन के लिए जो सजा होगी उससे 8 गुनी कम सज़ा सामान्य आदमी को होगी।
यह अद्भुत नियम है।
जो सबसे आसानी से गबन कर सके उसे सबसे कड़ी सजा और जिसके पास गबन करने के अवसर कम उसे सबसे कम सज़ा।
जीवन के लिए जरूरी चीजों को नष्ट करने, समाजानुकूल कार्य न करने की सज़ा, समाज द्वारा तिरस्कार और यमलोक में मिलने वाली तेल की कढ़ाही।
यही डर इतने कठिन थे कि अपराध करने की हिम्मत ही नहीं जुटती थी।
विज्ञान : सनातन में यह ज्ञान भी अध्भुत है, सूर्य से पृथ्वी की दूरी हनुमान चालीसा से जान लीजिए और  सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण का समय जानने के लिए #नासा से संपर्क करने की जरूरत नहीं।
सिर्फ पंचांग उठा ले और 2000 साल बाद पड़ने वाले ग्रहण की तिथि जान लें।
शिव : CERN लेबोरेट्री जिनेवा अपनी लॉबी में पूरी दुनिया के ईश्वर छोड़ नटराज की प्रतिमा रख लेती है और कहती है कॉस्मिक डांस जिससे ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई, जिसे हम जानने की कोशिश कर रहे हैं वह वही तांडव नृत्य ही है, जो नटराज ने किया था और इसी लिए हम वेदों के हिसाब इसे और अच्छे से समझना चाहते हैं।
ॐ : नासा एक दिन यकायक जागता है और बताता है कि सूर्य से निकलने वाली ध्वनि #ॐ ही है, यह ब्रह्मांड का स्वर है, जिसे हम हज़ारो साल से उच्चारित कर रहे हैं। 😂
अंगकोर वॉट और मोहन जोदड़ो की सभ्यता का विज्ञान हो या मन्त्र शक्ति की बात, विज्ञान इनको समझने को कोशिश में है।
ध्वनि तरंगों का उपयोग सैकड़ो कामो में हो रहा है।
भोजन : इतनी विविधता, इतने मसाले, इतने स्वाद और गंध किस देश मे हैं, जरा सोच कर देखें।
वर्ण व्यवस्था : इतनी व्यवस्थित वर्ण व्यवस्था किसी देश या धर्म मे नहीं है।
जन्म से रोज़गार/कला शिक्षा  और कहीं भी नही है।
सोचें, 5 वर्ष की उम्र से रोजगारउन्मुख शिक्षा और 20 साल की उम्र के बाद रोजगार की शिक्षा क्या बेहतर है?
गोत्र : व्यवस्थित योग्यताओ को जीन्स के हिसाब से बचा के रखना, अदुभुत नहीं है क्या?
हमने तो आंखों के रंग के हिसाब से, बालो के रंग के हिसाब से और अंगविन्यास के हिसाब से शारीरिक खराबियों को डीएनए के टेस्ट के बिना ही खत्म कर दिया।
न्याय : सनातन धर्म ने सामाजिक दबाव और अद्भुत दंड परंपरा से यह तय दिया कि घर और समाज ही उनके आश्रितों के लिए जवाब देह होंगे और जितना प्रभुत्वशाली व्यक्ति अपराध करेगा उसे उतना बड़ा दंड प्राप्त होगा।
सनातन ने पर्यावरण की सुरक्षा भी तय की, सर्प, देव हैं और गौ, माता, पीपल, नीम, बरगद जैसे 7 वृक्ष देव तुल्य हैं।
सिंह देवी और श्वान भैरव का साथी।
इससे बेहतर पर्यावरण रक्षा के नियम क्या हो सकते हैं?
घर मे काम करने आने वाली सामाजिक न्याय : नाउन से लेकर वस्त्र प्रक्षालन करने आने वाला धोबी भी हमारे लिए, काका, मौसी और बुआ होते थे।
इससे बेहतर सामाजिक न्याय क्या हो सकता है।
भिक्षुक ब्राह्मण, दंडी स्वामी राजा को गलत काम करने से रोक सकते थे।
इससे ज्यादा ताकत का विकेंद्रीय करन सम्भव ही नहीं।
वसुदैव कुटुम्बकम, सबै भूमि गोपाल की, यह कहावते पश्चिम को समझ मे नहीं आती पर यह अद्भुत हैं।
सबको अपना लेना अपना मानना सामाजिक दोषों को कम करता है।
कर्म : जैसे कर्म होंगे वैसा फल मिलेगा यह भारतीय विचार अब अमेरिका से #कर्मा या कार्मिक थ्योरी के नाम से वापस आ रहा है। 😂
क्रमश:
नोट- विचारिये, क्या अब समय नहीं आ गया है कि हम सनातन धर्म, सनातन शासन व्यवस्था, धार्मिक कानून और इसकी परंपरा को समझने और पुनः स्थापित करने की तरफ ध्यान दें 🙏
#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

लेबल: , , , , , , , , , , , , , , , ,

शुक्रवार, 1 मार्च 2019

द्विपार्टी व्यवस्था की तरफ कांग्रेस

#हथौड़ा_पोस्ट
2011 - भ्रष्टाचार पर चर्चा शुरू।
2012 - गुजरात दंगों पर चर्चा, मोदी हत्यारा, खून का दलाल।
2013 - करन थापर का इंटरव्यू - मोदी ने मुसलमानों को कुत्ता बोला ।
2014 - सब प्रदेशो में कांग्रेस सरकार है, मोदी क्या भूटान या नेपाल से प्रधानमंत्री बनेगा।
मोदी को AICC में चाय बेचने की जगह दूंगा - मणि शंकर
2014 - मोदी प्रधानमंत्री बने।
2015 - अखलाख, जे एन यू और न जाने कितने मामले।
गाय का अपमान, अपराधी अखलाख को फ्लैट और पैसे।
2016 - हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश ठाकोर।
नक्सल समस्या
2017 - गुजरात मे बवाल - कश्मीर समस्या, राहुल की हिन्दू धर्म मे घर वापसी, #मन्दिर_भ्रमण_शुरू।
कैराना ।
2018 - भीमा कोरेगांव, भीम आर्मी।
Sc St एक्ट, राम मंदिर, सुप्रीम कोर्ट जज विवाद।
2014 से 2018 के बीच 3 तलाक से लेकर सवर्ण आरक्षण तक।
वेमुला से लेकर गौकशी तक, जगहों के नाम बदलने से लेकर शबरीमला तक जितनी बातो को  कांग्रेस चर्चा में लायी हर बात में उसने मुंह की खाई।
#बीजेपी का फायदा ही चर्चा और विरोध में है।
और राष्ट्रहित के लिए #हमारा_फायदा उन चर्चाओं को याद रखने और लोगो को याद दिलाने में है।
2019 - पुलवामा पर भी भसड़ मचा कर देख लो जानी 😂
#कांग्रेस सिर्फ मुसलमानों, वामपंथी और क्षेत्रीय पार्टियों को निपटाने के लिए ही 5 सालो से लगी है।
उसे मालूम है कि द्विपक्षीय राजनीति में ही उसका खोटा सिक्का चलेगा।
इसलिए केजरी हो या माया ममता, कांग्रेस सबसे दूर है।
गांधियों के पास पैसा है, वह सोचती है 5 साल और इन 5 राज्यो से खर्चा चल जाए फिर 2024 में अगर जनता मोदी से ऊब गयी तो हम फिर सत्ता में आएंगे।
अगर 2024 में न आये तो 2029 तो पक्का ही है।
तब तक ये क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएंगी।
और कांग्रेस और बीजेपी ही दौड़ में रहेंगी।
यह भी #सही_सोच है। 😂
अब देखिए, नेहरू के जमाने से वाम पंथियों से फंसी कांग्रेस अब वामपंथ और नेहरूवियन सोच से मुक्त हो रही है।
#अल्पसंख्यक प्रेम से चोट खाई कांग्रेस अब हर वह काम कर रही है जिससे #मुस्लिम डरा हुआ महसूस करे और क्षेत्रीय दलों का विकल्प उसके पास न हो और वह कांग्रेस के साथ खड़ा हो। 😂
#हिन्दू_आतंकवाद  की झूठी अवधारणा गढ़ने से जो मुसलमान #कांग्रेस के साथ न आया अब वह कांग्रेस का मुंह ताक रहा है।
#वामपंथ अब Ravish Kumar सा कमजोर हो गया है।
फारुख और मेहबूबा अब समाप्ति की ओर हैं।
माया, सपा और ममता ज्यादा समय संघर्ष न कर पाएंगे, #लालू   कांग्रेस द्वारा जेल पहुंचा दिए गए हैं।
शरद की उम्र हो चली है।
जयललिता रहीं नहीं, शशिकला जेल में हैं।
चश्मे वाले नेता जी अब कितना जियेंगे।
केजरी की राजनैतिक हत्या कांग्रेस ने गठबंधन न कर के कर दी है।
अब बचा क्या?
आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक और उड़ीसा बचेगा शायद, पर इन राज्यो का संख्याबल है ही कितना जो कांग्रेस के लिए मायने रखे?
#मोदी का सही उपयोग #कांग्रेस ने करने का सोचा था पर मोदी ने नेशनल हेराल्ड में गांधियों को फंसा दिया।
बस प्रियंका बची हैं इस #मोदी_मार से, इसलिए दीदी भैया के साथ हैं अन्यथा इनका सीताराम तय था। 😂
कांग्रेस यही करती आई है1989 में जब #VP_Singh को सरकार सौंपी तो खजाना खाली था।
1998 में #अटल_जी को खाली खजाना दिया और 2004 में भरा खजाना पाया।
2014 में खाली खजाना दिया और जब मोदी इसे छोड़ेंगे तो खजाना भरा होगा।
इसमे कोई दोमत नहीं कि कांग्रेस की चाले शानदार होती हैं।
पर कांग्रेस की इन चलो से वामपंथ और समाज वाद की लंका लग गयी और मुसलमानों को कांग्रेस ने विकट परिस्तिथि में डाल दिया।
इस्लाम पर हुई सारी चर्चाओं में कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने जो TV डिबेट किये उसमे #इस्लाम जम के बदनाम हुआ और समाज मे जो खाई बनी उससे मुसलमानों का बड़ा नुकसान हुआ।
आज भी सबसे ज्यादा मुखर कांग्रेसी मुस्लिम यूथ ही है, और इसी मुस्लिम युवा के प्रश्नों से सनातनी युवा इस्लाम की दबी छुपी बातों को और कमजोरियों को जान पाए और संगठित हुए।
अब अगर 80% हिन्दुओ में से 25% भी संगठित हो गए तो वे 18% मुसलमानों से ज्यादा वोट काउंट रखेंगे 😂
मतलब, वामपंथ, समाजवाद, क्षेत्रीय पार्टीयां और मुस्लिम कांग्रेस की इस #राहुल_प्रियंका  नामक पीढ़ी की भेंट चढ़ा दिए गए।
सच यह #नहीं कि कांग्रेस खत्म हो रही है बल्कि सच यह है कि कांग्रेस #हाईबरनेशन में है और #खत्म #वामपंथ #समाजवाद और #क्षेत्रीय_पार्टियां हो रही हैं।😂 🙏
अलख निरंजन
#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

लेबल: , , , , , , , , ,