सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

मीमांसा सनातन संविधान की...

कभी कभी लगता है जीवन बड़ा धूर्त है और हम भोले, जैसा जीवन होता है वैसा हम उसे देख नही पाते, और जो वह समझाना चाहता है उसे हम नज़र अंदाज़ कर देते हैं।
रोज़ वही प्रश्न होते हैं और वही आश्वासन ।
रोज़ सुबह नई आशाएं जन्म लेती है और रात में वीरगति को प्राप्त होती है और अगले दिन फिर वही आशाएँ।
यह क्रम है और यह इसलिए नही टूटता क्योंकि हम कड़े प्रश्न करने से बचते हैं, हम भ्रमित रहते हैं, हम आसक्त होते हैं हम लालची होते हैं और सबसे ज्यादा आशान्वित भी।
कभी हम शुतुरमुर्ग हो जाते हैं तो कहीं चीते की तरह आक्रामक पर हम व्यवस्थित और निष्पक्ष नही होते।
हम भावुक हो सकते हैं हम दयावान हो सकते हैं हम निर्दयी हो सकते हैं पर निर्विकार नहीं।
हम प्रेम कर सकते हैं नफरत कर सकते है पर एक ही व्यक्ति से एक ही समय मे हम नफरत और प्रेम एक साथ नही कर सकते।
2 ही तरह के विरोधाभासी लोग हमने सुने हैं,
दिलेर और भीरु
गुस्से वाला और शांत
दिलदार और कंजूस
हंसमुख और गुस्सेवाला
पर क्या आपने कभी सुना कि ये दोनों विशेषताएं एक साथ किसी व्यक्ति में हों।
ऐसी 100 विशेषताएं है पर क्या आपने कोई ऐसा व्यक्ति देखा है, जो एक समय में यह दोनों विरोधाभासी भाव जी सके, अगर कोई ऐसा व्यक्ति हुआ तो वह अप्रतिम होगा परुषोत्तम होगा क्योंकि वह भावनाओ से नही चलता वह परिस्तिथि और आदर्शो के हिसाब से चलता है।
यही आध्यात्म की पहली सीढ़ी है और जीवन के अमूल्य और खुशहाल होने में सिर्फ इतना ही फासला है और इतना ही फासला है बुद्धू से बुद्ध होने में।
बुद्ध ने कहा था "पाप से घृणा करो, पापी से नही" इस एक वाक्य का मतलब है कि आप उस व्यक्ति से नफरत नही कर रहे उसके कर्म के आप विरोधी हो और अगर आप ऐसी व्यवस्था पैदा कर सको की बिना दंड के आप उसे सुधार सको जिम्मेदार बना सको तो आप अपने आपको बुद्धत्व के नजदीक पाओगे।
यही सनातन का मूल है, सनातन का ही क्यों यह हर धर्म का मूल है,
कोई भी धर्म हमे किसी जीव, व्यक्ति या वस्तु से घृणा करना नही सिखाता, हर धर्म हमे गलत कर्मो से बचने की सलाह देता है।
पर इन सभी धर्मों का उलट है हमारा संविधान (चाहे वह किसी भी देश का हो)।
हर धर्म मे प्रायश्चित का प्रावधान है हर धर्म मे अप्रत्यक्ष दंड का या पुरुस्कार का प्रावधान है,पर संविधान प्रायश्चित नही मानता बल्कि इसके उलट संविधान में प्रत्यक्ष दंड का प्रावधान है जो किसी धर्म मे नही है,
इस प्रत्यक्ष दंड के प्रावधान के बावजूद अपराध रुक नही रहे।
धर्म कहता है, गरीब का, निसंतान का या अनाथ का पैसा खाना पाप है, गौ हत्या या शूकर स्पर्श पाप है, शराब हराम है, और हम इन हर धार्मिक बातो को मानते है, इन बातों की रक्षा के लिए लड़ जाते हैं, पर संविधान में लिखी बातों को हम न सिर्फ तोड़ते हैं बल्कि अपने मित्रों के बीच उन अपराधों का महिमा मण्डन करता है।
कोई ललित मोदी बन जाता कोई विजय माल्या कोई दाऊद हो जाता है कोई कलमाड़ी।
फर्क यही है कि हमे संविधान पापी से घृणा करना सिखाता है और हम सीखते है कि जो पकड़ा जाए वह पापी।
मतलब दुनिया का हर संविधान हमे बुद्ध से बुद्धू बनाने की तरफ ले जाने अग्रसर है।
धर्म हमे सिखाता है कि श्रेष्ठ बनो, धर्म करो ऊपर वाला सब देख रहा है और मरने के बाद सज़ा देगा।
संविधान कहता है, श्रेष्ठ बनो या न बनो पर गुनाह न करो पुलिस वाला देख रहा है, जज बैठा है सज़ा देगा।
और हम सीखते हैं कि कानून की ऐसी की तैसी, आदमी मार दो हम पुलिस को प्रसाद चढ़ा देंगे, जज को बेलपत्री पहुंचा देंगे, सब ठीक हो जाएगा।
पर अगर आप उसी व्यक्ति को कहो कि गाय मार दो तो वह आपको चमाट जड़ देगा, क्योंकि इस बात से उसका बुद्धत्व जाग जाएगा।
और किसी से अगर गलती से गाय मर जाये तो वह संवेदना व्यक्त करेगा हत्यारे को ठाठस बंधायेगा, अपराधी से घृणा तो नही ही करेगा।
यही है मूल बुद्ध के बुद्धत्व का...
क्रमशः
#मीमांसा_सनातन_की

#स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

लालच या अज्ञानता 🙏

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स्वास्थ्य जागरुकता हेतु
#रुट_कैनाल - #लालच या #अयोग्यता ?…
स्वस्थ रहने के डर को कैसे एक लालची या अयोग्य Dr आपके दोहन का साधन बनाता है इसका अप्रतिम उदाहरण है यह केस।
मेरे दांत की ठनक का निदान डॉ प्रथमेश राय के मुताबिक सिर्फ रुट कनाल था, और डॉक्टर प्रथमेश का कहना था कि वे अकेले ही हैं जो शहर में एकमात्र दंत चिकित्सक हैं जो सर्वश्रेष्ठ #TOOTH_RESTORATION करते हैं, वे ही हैं जो शहर के आधा दर्जन स्थापित दंतचिकित्सको के क्लीनिको में दंतपुनर्निर्माण के लिए बुलाये जाते हैं।
विश्वास ही तो मजबूरी है मरीज की, डॉ उसके लिए भगवान होता है।
बात तय हुई कि दांत का #रुट_कैनाल करवाना है और 3000₹ डॉ के कर्मकांड (प्रोसीजर) की फीस तय हुयी और 1 सिटिंग में दांत फिक्स करने का वादा हुआ।
पर लगी 3 सिटिंग और मिला ढेरो दर्द और खोखला दांत। 😂
डॉक्टर प्रथमेश अपनी सर्जरी कर चुके थे।
और कैपिंग के बाद उसी दाँत में दर्द की बेइंतिहा लहर ने रातो की नींद उड़ा दी।
मैं डॉ प्रथमेश से मिला तो उन्होंने कहा #CBCT (Dental Cone Beam CT) कराएं, CBCT भी कराई गई, (चित्र नीचे है)
पता चला डॉ रूपी भगवान ने रुट में डाली जाने वाली #गटापारचा कुछ मिलीमीटर ज्यादा अंदर घुसेड दी है, कुछ इस तरह ड्रिल चलाया कि
दाढ़ का बेस हिल गया है, उन्होंने दांत भयंकर रूप से बुरी अवस्था मे ला दिया गया है।
अब शुरू हुआ असली खेल- दांत को पोला करके छोड़ दिया गया, कहा गया कुछ दिन रुक जाइये फिर कैपिंग करेंगे।
अब शुरू हुआ एक नया दर्द कि अगर उस खोखले दांत के नीचे कुछ कड़ा आया तो दांत टूट जाएगा (दांत खोखला छोड़ा गया था), अतः मैं लिक्विड डाइट पर आ गया और जबड़े के उस तरफ से भोजन करना बंद कर दिया, जिस तरफ डॉ प्रथमेश ने दंतचिकित्सा में मास्टर्स डिग्री लेकर आधिकारिक रूप से बैंड बजाकर ज्यादा लम्बी गटापार्चा डाली गई थी।
6 महीने बिना क्रिस्पी क्रंची भोजन के यह #भोजन_प्रेमी_ब्राह्मण रोज़ इसे अपने किसी पूर्व पाप का कारण मानता रहा और ईश्वर से प्रार्थना करता की उसका दांत शीघ्र ठीक हो।
कल शाम को डॉ प्रथमेश ने हाँथ खड़े कर दिए और कहा कि अब दाढ़ उखाड़ी जाएगी और नया परमानेंट फिक्स दांत लगेगा खर्च होगा 36000 ₹ मात्र।
तो मैंने पूछ लिया कि मैं दांत की सेंसिटिविटी ठीक करवाने आपके पास आया था न कि दांत बदलवाने।
इस दाँत को ख़राब करने का श्रेय मैं किसे दूँ?
तो धरती के ये चिकित्सकीय भगवान हत्थे से उखड़ गए, कहने लगे अब दांत खराब हो गया है सुधरवाना हो तो पैसे जमा करो अन्यथा #खोखला दांत लेकर घूमो।
अब यह स्वाद प्रेमी ब्राह्मण करे तो करे क्या?
तो मैंने रिसर्च की, विश्वस्त सूत्रों, कुछ मित्र और परिवार के दंत चिकित्सको से बात की तो निष्कर्ष निकला कि यह जो हुआ है इसके कारण सिर्फ 2 हो सकते हैं।
1- डॉक्टर का लालच और उसकी यह समझ कि अपने स्वास्थ्य और स्वाद के प्रति चिंतित मरीज को और दुहा और लूटा जा सकता है।
2- डॉक्टर की अयोग्यता।
रुट कनाल के समय हर डॉ एक्स रे कर यह देखता है कि गटा पारचा कितना अंदर गया है पर इन्होंने यह नही देखा और यदि देखा था तो तुरंत सुधार क्यों नहीं किया। (क्या नम्बर 1 इसका कारण था)
क्या प्रथमेश की योग्यता/ समझ/ बुद्धि में कोई कमी थी जो बेसिक प्रोसीजर के तरीक़े को ही वे भूल गए?
इस पोस्ट/मेसेज को लिखने का कारण यह है कि मेरे सभी चिकित्सक मित्र इस पर सलाह दे और मरीज सतर्क रहें कि रुट कैनाल के बाद और पहले डॉ तुरंत एक्स रे करे।
डॉक्टर मित्र यह भी बताएँ कि यह डॉक्टर प्रथमेश की अयोग्यता थी या लालच?
नोट : लापरवाह या गलती करने वाले डॉक्टर को क़ानून अपराधी मानता है।
सबसे महत्वपूर्ण : आपसे निवेदन है की इस पोस्ट को आप स्वास्थ्य जागरुकता अभियान के तहत शेयर करें!
#Dr. #Prathmesh #Rai #अरुणोदय #डेंटल #क्लीनिक Opposite Commercial Auto, Besides Shastri Bridge., Jabalpur/ स्पेशलिस्ट डेंटल हब Madan Mahal Station Road, Wright Town., Jabalpur
कमर्शियल ऑटोमोबाइल के सामने शास्त्री ब्रिज

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