क्या AI सरकारी योजनाओं के अभिसरण Convergence के लिए नया सेतु बन सकता है? आज के बदलते भारत में हमारी सरकार की योजनाएं न केवल अद्भुत हैं बल्कि पूरी तरह से गरीबोन्मुखी और अंत्योदय के विचार से प्रेरित हैं। चाहे वह सहकारिता का क्षेत्र हो MSME हो कृषि हो या अक्षय ऊर्जा हर क्षेत्र में प्रगति के लिए हमारे पास अत्यंत मजबूत नीतियां और रोडमैप मौजूद हैं। लेकिन जमीनी हकीकत का विश्लेषण करने पर एक बड़ी चुनौती स्पष्ट रूप से उभरती है अभिसरण Convergence की कमी। Silos में कार्य और उसकी चुनौतियां वर्तमान में विभिन्न विभाग अक्सर अपनी सीमाओं या silos में काम करते हैं। इसकी वजह से एक ही लाभार्थी उन सभी योजनाओं का एकीकृत लाभ लेने से वंचित रह जाता है जो संयुक्त रूप से उसके जीवन में आमूल चूल परिवर्तन ला सकती हैं। उदाहरण के लिए एक किसान जो औषधीय खेती करना चाहता है उसे अक्सर कृषि आयुष और वित्त विभाग के बीच समन्वय बिठाने में संघर्ष करना पड़ता है। एक नई दृष्टि AI को सौंपें अभिसरण का दायित्व यहाँ मेरा प्रस्ताव है कि क्या हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI को एक समर्पित अभिसरण विभाग या कन्वर्जेंस सेतु के रूप में देख सकते ह...
परोपकार अब्राहमिक बनाम सनातन दृष्टिकोण दुनिया भर में हर साल 600 बिलियन डॉलर से अधिक का दान दिया जाता है। इसके बावजूद, धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है, गरीबी अपने चरम पर है, जंगल अंधाधुंध कट रहे हैं और जीव-जंतु विलुप्ति की कगार पर हैं। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि हम दान कर रहे हैं या नहीं; बल्कि यक्ष प्रश्न यह है कि: हम दान किसके लिए और किस उद्देश्य से कर रहे हैं? क्या हमारी सोच और संवेदना का दायरा उतना ही विशाल है, जितनी विकराल आज की वैश्विक समस्याएं हैं? परोपकार (Philanthropy) हमेशा से मानवीय समाज की नींव रहा है। लेकिन दान के पीछे की वैचारिक पृष्ठभूमि (Framework) ही उसके वास्तविक प्रभाव को तय करती है। आज हम विश्व की दो प्रमुख विचारधाराओं, अब्राहमिक परंपराओं और सनातन धर्म, की तुलनात्मक समीक्षा करेंगे। उद्देश्य यह समझना है कि वर्तमान की गंभीर पर्यावरणीय और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए, हमें दान की परिभाषा को पु...