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ब्राह्मणत्व के खिलाफ वामपंथी षड्यन्त्र

वामपंथीयो ने ऐसा इतिहास बदला कि सबकी मति पर पर्दा पड़ गया । ब्राह्मण सिर्फ पूजा पाठ करते थे। तो मंगल पांडेय कौन थे, चंद्र शेखर आज़ाद कौन थे? ब्राह्मण भीख मांग के खाते थे तो पेशवा कौन थे? शूद्र जातियों का दमन होता था तो रानी दुर्गावती राजा मदन और गौंड राजा कौन थे? दलित ज्ञान से वंचित रखे जाते थे तो रैदास और घासी दास कैसे ज्ञानी और सम्मानीय हुए? मुझे लगता है यह ऐसी कर्माधारित व्यवस्था थी जिसे अगर कोई चाहे,  तो छोड़कर अपनी योग्यता के आधार पर दूसरी व्यवस्था में जा सकता था। ऐसा ही था जो बाजीराव क्षत्रियों का काम कर रहे थे । महिलाओं के शोषण के आरोप हिन्दू समाज पर लगाए जाते हैं, वामपंथी इसके लिए महिला सशक्तिकरण के आंदोलन चलाते हैं। पर जब मैं इतिहास पढ़ता हूँ तो मुझे कृष्ण की पत्नी रुक्मणि दिखती है, सीता का स्वयंवर दिखता है, माता सति का भगवान शंकर के लिए अपने पिता के खिलाफ किया आत्मदाह दिखता है। वामपंथी कहते हैं हम ब्राह्मण असहिष्णु थे,  तो कैसे इसी व्यवस्था से,  गुरुनानक देव जी ने नया धर्म खड़ा किया और इसी व्यवस्था से जैन और बौद्ध बने, इसी व्यवस्था ने पारसियों, मुसलमानों और ईसाइयों क...

यह #MODIfiedIndia नहीं है।

#हथौड़ा_पोस्ट 24 तारीख से देख रहा हूँ प्रबुद्ध और स्थापित लोग लिख रहे है, यह मोदी का इंडिया है, मोदी ने भारत को बदल के रख दिया और ब्लॉ ब्लॉ ब्लॉ 😂 असल मे किसी भी चीज़ को देखने के 3 तरीके हैं। 1- अपने फायदे की नज़र से 2- दूसरे के फायदे की नज़र से 3- निष्पक्ष नज़र से अधिकतर लोग तीसरे तरीके तक पहुंच ही नहीं पाते। यह मोदी का भारत नही न ही यह #MODIfiedIndia है, यह वही पुराना चाणक्य, राम, पोरस, विक्रमादित्य, महाराणा और शिवाजी का भारत है। संविधान के आगमन से इसमे कुछ फर्क आये थे, जो अब सुधर रहे हैं। नेहरू के आगमन के बाद प्रधानमंत्री के स्वार्थ, देश और प्रजा से बड़े हो गए थे। #प्रधानमंत्री को राजा के समान अधिकार  नही थे और वह खुद को प्रजा का सेवक मानना नही चाहता था। 5 साल के लिए आने वाला राजा पहले खुद का घर भरना चाहता था। बस इसीलिए शुरू हुई यह लूट और स्वार्थ की होड़। 4 अंग्रेज़ी अखबार जो लिखते थे वह दिन दो दिन बाद पूरे देश मे छपता था, और देश उसे ही सही मानता था। और उन अखवारों के खबर नवीसों को जनता हरिश्चंद्र का अवतार मानती थी। अब #सोशल_मीडिया है, जो खबर छपने से पहले ही दिखा देता ...

मीमांसा सनातन संविधान की...

कभी कभी लगता है जीवन बड़ा धूर्त है और हम भोले, जैसा जीवन होता है वैसा हम उसे देख नही पाते, और जो वह समझाना चाहता है उसे हम नज़र अंदाज़ कर देते हैं। रोज़ वही प्रश्न होते हैं और वही आश्...

भारतीयता और पश्चिम...

हिन्दोस्तान की जिसे समझ है, वह जानता है कि इस देश ने अंगुलिमाल को सन्त स्वीकारा है, रावण को हम हर वर्ष जलाते हैं पर उसे प्रकांड पण्डित भी मानते है और रावण रचित शिव तांडव स्त्र...

भारतीयता और पश्चिम...

हिन्दोस्तान की जिसे समझ है, वह जानता है कि इस देश ने अंगुलिमाल को सन्त स्वीकारा है, रावण को हम हर वर्ष जलाते हैं पर उसे प्रकांड पण्डित भी मानते है और रावण रचित शिव तांडव स्त्र...