लोकसभा : २०१४
वि. स. चुनाव ख़त्म हुए - लोकसभा चुनावों कि रणभेरी बजने लगी है !! परिणाम शानदार रहे हैं - जे पी के बाद कुछ ताज़ी बयार चली है !! बी जे पी और कांग्रेस के पैरो तले जमीन खिसकी हुयी है - सच कहें तो ये नेताओं के लिए विश्वसनीयता का सन्कट है !! इस संकट से उबरने के लिए सिर्फ विश्वसनीयता की जरूरत है - आप कितने भी चतुर पैतरे बाज़ कौटिल्य या विदुर हों अगर आप विश्वसनीय नहीं है तो आप संकट में हैं !! ये नेताओ को समझ में आ गया है, वे सिर जोड़ के मंथन कर रहे हैं ; नए पैतरे सोच रहे हैं , अब अशोक रोड का दफ्तर हो या अकबर रोड का सभी एक ही बात पर चिंतन कर रहे हैं !! जनता भी चिंतन कर रही है, वह कम बुरे और ज्यादा बुरे में कम बुरे को चुन रही है या किसी नयी पार्टी को विकल्प बनाना चाह रही है !! दिल्ली के विधान सभा चुनावों में जो हुआ वह लोकसभा में होगा ऐसा नहीं है - शहरी मतदाता "आप" को वोट कर सकते हैं - पड़े लिखे ग्रामीण मतदाता भी आप कि तरफ आकर्षित हो सकते हैं ; पर आज भी भारत की ८०% लोकसभाओं की ७०% जनता ग्रामीण है, और ग्रामीण जनता "आप" से ज्यादा परचित नहीं है ; विधान सभा च...