धर्म या ईश्वर की अवधारणा मानव समाज के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी उसके लिए हवा। अपनी सारी उपलब्धियां और हार के लिए उसे कोई तो चाहिए जिसको वह इसका कारक बताये। खुद की गलतियों क...
#हथौड़ा_पोस्ट बड़ा गड़बड़ है भई, भयंकर संघी भी यह मान रहे हैं कि @BJP4INDIA मुस्लिम तुस्टीकरण के रास्ते चल पड़ी है। सरकार संघ की विचारधारा से भटक गई है। यह सच नहीं है, यह अखबारों की खबरों और ...
क्या कभी हम अपने गिरहबान में झांकेंगे? सनातन : धर्म की व्याख्या है, धार्यति इति धर्म: मतलब जो धारण किया जाए वह धर्म। तो हम धारण करते है, आचार, विचार और व्यवहार। हम उसे बनाते हैं ...