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Sustainability is not cheap.

#वहनीयता #Sustainability  कभी सस्ती नहीं थी, यह जहां जहां सस्ती थी ब्रिटिश शासन ने वहां और #सस्ता #औद्योगिक माल भेज कर उस ज्ञान को ही खत्म कर दिया जो हमें  #आत्मनिर्भर बनाता था। गांव हो या शहर हर उपयोग की वस्तु हस्त या मशीन निर्मित हम खुद बनाते थे अब बिना #चिप के #कार नही बना सकते।।  जूते बनाने वाले टोकरी बनाने वाले और लोहे के औजार बनाने वाले कितने बचे हैं? #सस्टेनेबिलिटी कभी सस्ती नहीं थी न ही #पर्यावरण को बचाना सस्ता है। आज पर्यावरण की महत्ता समझ आती है क्योंकि पृथ्वी चीख रही है पर #मनुष्य दिग्भ्रमित है उसे किसी भी कीमत पर उत्पादकता बढ़ना है और माल सस्ता करना है। माल सस्ता करने से आत्मनिर्भरता नहीं आती #निर्भरता बढ़ती है। बड़ी मशीनें और ऑटोमोशन जो मेहनत कम करवा रहीं हैं, वे आपकी आयु से समय कम कर रहीं हैं आपका रोजगार छीन रही हैं, अमीरी और गरीबी का अंतर बढ़ा रहीं हैं। आपको क्या लगता है, क्या ये मशीन निर्मित वस्तुएं आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, या देश के लिए या आपकी जेब के लिए या आपके रोजगार के लिए या आपके नौनिहालों के भविष्य के लिए? #विचारिये #श्रीमान #स्वदेशी आत्मनिर...

भारतीय एवं पश्चिमी दर्शन का फर्क

#साइको_एनालिसिस ( #PsychoAnalysis) #मनोविश्लेषण  Vs #साइको_सिंथेसिस ( #PsychoSynthesis ) #मनो_संश्लेषण जो मैने जाना और समझा 🙏 साइको एनालिसिस को अगर मूल से समझना है तो पश्चिमी कार्य पद्धति को समझिए... वे हर चीज के छोटे छोटे टुकड़े कर उस पर रिसर्च/ व्यहवार और आचरण करते हैं, वे इसी में पारंगत हैं, उन्होंने #डॉक्टर बनाए फिर उन्हे स्पेशलाइजेशन करवाया और हर अंग के मूल में पहुंचने की कोशिश की। आंख का डॉक्टर अलग, हड्डी का अलग, नाक कान गला का अलग और जब शरीर पूर्ण हुआ तो उन्होंने औषधि के लिए एमडी मेडिसिन बना दिया। इसके विपरित #आयुर्वेद #Ayurveda ने साइको सिंथेसिस पर काम किया, वे मानते हैं कि शरीर की कोई भी समस्या पहले लक्षण बताती है कान का इलाज हो या आंख का यह #वात #पित्त #कफ की व्यवस्था असंतुलन से निर्धारित होता है। ऐसे ही आप पश्चिम और पूरब के #दर्शन और समाज शास्त्र को देखेंगे तो उसमे भी यही पाएंगे। सनातन व्यवस्था में समाज हो या परिवार  दोनो को हम सम्मलित रूप में देखते हैं, #मतलब संयुक्त रूप में एकीकृत या सामूहिक रूप में देखते हैं पर पश्चिम उसे अलग अलग या न्यूक्लियर/ माइक्रो ...

सनातन और जीवन

क्या कभी हम अपने गिरहबान में झांकेंगे? सनातन : धर्म की व्याख्या है, धार्यति इति धर्म: मतलब जो धारण किया जाए वह धर्म। तो हम धारण करते है, आचार, विचार और व्यवहार। हम उसे बनाते हैं ...