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व्यवस्था का जाल: एक नेता की मजबूरी Vs आम आदमी

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व्यवस्था का जाल: एक नेता की मजबूरी Vs आम आदमी यह भारत की नहीं वैश्विक समस्या है, ग्लोबल साउथ इसीलिये गरीब है और अफ्रीका दयनीय ।।  नोट: मीडिया को जागना होगा और उस व्यवस्था के पीछे के लोगों को बेनकाब करना होगा।।  कल्पना कीजिए एक नेता है। किसी भी देश का, भारत का, ब्राजील का, नाइजीरिया का, या फ्रांस का। वह चुनाव जीतकर आता है। उसके भाषण में गरीबों की बात है, किसानों की बात है, युवाओं के रोजगार की बात है। जनता ने उस पर भरोसा किया है। लेकिन कुर्सी पर बैठते ही उसे एहसास होता है कि असली सत्ता उसके हाथ में नहीं है। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हकीकत है जो दशकों से बनाई गई है, जिसमें हर नेता, चाहे वह कितना भी ईमानदार हो, धीरे-धीरे उसी का हिस्सा बन जाता है। आइए समझते हैं कैसे। पहली जंजीर: IMF और World Bank का "सहायता" का जाल जब किसी देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाती है तो वह IMF के पास जाता है। लेकिन यह सहायता नहीं, एक शर्त है। IMF और World Bank की शर्तें स्वीकार करने का अर्थ है, मुक्त व्यापार लागू करो, सरकारी कंपनियाँ बेच दो, सरकारी खर्च घटाओ। और परिणाम क...

धर्म और राजनीति

#हथौड़ा_पोस्ट धर्म और राजनीति : धर्म का राजनीति में प्रवेश राजनेताओ को पसंद नहीं। आखिर क्यूँ? सोचिये : अगर एक शंकराचार्य/ दंडी स्वामी/संत/आचार्य सत्तासीन नेताओ को निर्देशित ...

यह #MODIfiedIndia नहीं है।

#हथौड़ा_पोस्ट 24 तारीख से देख रहा हूँ प्रबुद्ध और स्थापित लोग लिख रहे है, यह मोदी का इंडिया है, मोदी ने भारत को बदल के रख दिया और ब्लॉ ब्लॉ ब्लॉ 😂 असल मे किसी भी चीज़ को देखने के 3 तरीके हैं। 1- अपने फायदे की नज़र से 2- दूसरे के फायदे की नज़र से 3- निष्पक्ष नज़र से अधिकतर लोग तीसरे तरीके तक पहुंच ही नहीं पाते। यह मोदी का भारत नही न ही यह #MODIfiedIndia है, यह वही पुराना चाणक्य, राम, पोरस, विक्रमादित्य, महाराणा और शिवाजी का भारत है। संविधान के आगमन से इसमे कुछ फर्क आये थे, जो अब सुधर रहे हैं। नेहरू के आगमन के बाद प्रधानमंत्री के स्वार्थ, देश और प्रजा से बड़े हो गए थे। #प्रधानमंत्री को राजा के समान अधिकार  नही थे और वह खुद को प्रजा का सेवक मानना नही चाहता था। 5 साल के लिए आने वाला राजा पहले खुद का घर भरना चाहता था। बस इसीलिए शुरू हुई यह लूट और स्वार्थ की होड़। 4 अंग्रेज़ी अखबार जो लिखते थे वह दिन दो दिन बाद पूरे देश मे छपता था, और देश उसे ही सही मानता था। और उन अखवारों के खबर नवीसों को जनता हरिश्चंद्र का अवतार मानती थी। अब #सोशल_मीडिया है, जो खबर छपने से पहले ही दिखा देता ...

संविधान और धर्म 🙏

चलो राजनीति से समाज शास्त्र पर आते है ।। हम बदल क्यों रहे है? प्रश्न अति महत्वपूर्ण है। 1 पीढ़ी पहले तक- जब विश्वविद्यालय में झगड़ा होता था तो कोई लड़का दूसरे को कहता था, भाई मेरी 1 ...