क्या मंत्र और शास्त्रीय संगीत औषधि है?
क्या कभी आपने सोचा है… कि एक मंत्र भी औषधि बन सकता है? लेखक: सचिन अवस्थी (अध्यक्ष, विश्व विजया फाउंडेशन, जबलपुर) सुबह का समय था। एक आयुर्वेदाचार्य अपने गुरुकुल में बैठे थे। सामने एक छात्र ने पूछा, "गुरुदेव, अगर मंत्र केवल शब्द हैं, तो उन्हें सुनते ही मन शांत क्यों हो जाता है? और कुछ राग सुनते ही ऐसा क्यों लगता है जैसे भीतर का बोझ हल्का हो गया हो?" आचार्य मुस्कुराए और बोले, "बेटा, हर औषधि स्वाद से नहीं पहचानी जाती। कुछ औषधियाँ स्पर्श से काम करती हैं, कुछ सुगंध से… और कुछ केवल कंपन से।" यहीं से एक ऐसा विषय शुरू होता है, जिस पर आज दुनिया भी गंभीरता से शोध कर रही है—मंत्र और नाद चिकित्सा। क्या ध्वनि सचमुच शरीर को प्रभावित करती है? ज़रा अपने जीवन की छोटी-छोटी घटनाएँ याद कीजिए। - माँ की लोरी सुनते ही रोता हुआ शिशु शांत हो जाता है। - मंदिर की घंटी बजते ही मन अपने आप भीतर की ओर मुड़ने लगता है। - किसी मधुर राग को सुनकर बिना किसी दवा के तनाव कम महसूस होने लगता है। अगर ध्वनि केवल कानों तक ही सीमित होती, तो ऐसा क्यों होता? यही प्रश्न हमें आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान—दोनों के द...