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₹10 करोड़ का प्रोजेक्ट, 0 नकद निवेश

  संलग्न दस्तावेज बिना नकद निवेश की चक्रीय ग्रामीण परियोजना? NCP 2025 पर आधारित एक भारतीय गांव के 5 क्रांतिकारी विचार जो हमारी अर्थव्यवस्था को बदल सकते हैं जब हम ग्रामीण विकास के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर एक ही तस्वीर दिमाग में आती है: ऐसी परियोजनाएँ जो इरादों में तो नेक होती हैं लेकिन हमेशा अनुदान (grants) पर निर्भर, तकनीकी रूप से साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर होती हैं। उन्हें सामाजिक लागत (social cost) के रूप में देखा जाता है, न कि आर्थिक इंजन के रूप में। प्रचलित धारणा यह है कि बाहरी भारी-भरकम फंडिंग और कॉर्पोरेट स्वामित्व के बिना किसी गांव में बड़े पैमाने पर लाभदायक बुनियादी ढांचा बनाना असंभव है। हमने हाल ही में एक ऐसा दस्तावेज़ बनाया, जो इन धारणाओं को पूरी तरह से तोड़ देता है। यह किसी थिंक टैंक का सैद्धांतिक शोध पत्र नहीं था, बल्कि मध्य प्रदेश, भारत के एक गांव का विस्तृत परियोजना प्रस्ताव था। इसे "मां रेवा इंटीग्रेटेड गौ-ऊर्जा मॉडल" कहा गया है। यह एक आत्मनिर्भर, ग्राम सभा (समुदाय) के स्वामित्व वाली सहकारी समिति (cooperative) की योजना है जो सामाजिक रूप से परिवर्तनकारी ह...