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संदेश

!!गाँधी के उत्तराधिकारियों से प्रश्न !!

मैं संघी - कांग्रेसी - आरक्षण विरोधी - आरक्षण के पक्षधर - समाजवादी - बीजेपी और आर टी आई एक्टिविस्ट्स के साथ रहा और उनको समझने की भरपूर कोशिश की !! अलग अलग विचार धाराओं को जानने समझने के प्रयास में सिर्फ एक चीज़ समझ पाया कि सत्ता के गलियारों तक पहुँचने के लिए जो रास्ते जाते हैं ; उन पर आने वाला हर गतिरोध आपका दुश्मन है और हर घाट आपका मित्र - मित्र इसलिए क्योंकि वो गंतव्य तक पहुँचाने वाली आपकी गति में वृद्धि करता है !! पर वर्त्तमान राजनीती में परंपरागत गतिरोध और घाट बदल गए हैं - पहले ये महगाई, गरीबी, शिक्षा, सीमा की सुरक्षा और सिंचाई के साधन होते थे !! अब ये साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार पर आ कर थम गए हैं !! लगता नहीं की थर्ड फ्रंट, कांग्रेस और कम्युनिस्ट इन पुराने मापदंडों पर यकीन करते हैं !! बीजेपी शायद इन पुराने मापदंडों पर अभी भी विश्वास करती है इसलिए गुजरात का विकास मॉडल - सरदार पटेल की मूर्ति के साथ साथ नए मुद्दे जैसे भ्रस्टाचार और गुजरात में गोधरा के बाद की शांति का भी जिक्र करती है !! ये समझ में नहीं आता कि १२५ साल पुराणी कांग्रेस और उसके साथ जुडी थर्ड फ्रंट के घाघ...

लोकसभा : २०१४

वि. स. चुनाव ख़त्म हुए - लोकसभा चुनावों कि रणभेरी बजने लगी है !! परिणाम शानदार रहे हैं - जे पी के बाद कुछ ताज़ी बयार चली है !!  बी जे पी और कांग्रेस के पैरो तले जमीन खिसकी हुयी है - सच कहें तो ये नेताओं के लिए विश्वसनीयता का सन्कट है !!  इस संकट से उबरने के लिए सिर्फ विश्वसनीयता की जरूरत है - आप कितने भी चतुर पैतरे बाज़ कौटिल्य या विदुर हों अगर आप विश्वसनीय नहीं है तो आप संकट में हैं !!  ये नेताओ को समझ में आ गया है, वे सिर जोड़ के मंथन कर रहे हैं ; नए पैतरे सोच रहे हैं ,   अब अशोक रोड का दफ्तर हो या अकबर रोड का सभी एक ही बात पर चिंतन कर रहे हैं !! जनता भी चिंतन कर रही है, वह कम बुरे और ज्यादा बुरे में कम बुरे को चुन रही है या किसी नयी पार्टी को विकल्प बनाना चाह रही है !! दिल्ली के विधान सभा चुनावों में जो हुआ वह लोकसभा में होगा ऐसा नहीं है - शहरी मतदाता "आप" को वोट कर सकते हैं - पड़े लिखे ग्रामीण मतदाता भी आप कि तरफ आकर्षित हो सकते हैं ; पर आज भी भारत की ८०% लोकसभाओं की ७०% जनता ग्रामीण है, और ग्रामीण जनता "आप" से ज्यादा परचित नहीं है ; विधान सभा च...

टार्च बेचनेवाले : श्री हरिशंकर परसाई

वह पहले चौराहों पर बिजली के टार्च बेचा करता था । बीच में कुछ दिन वह नहीं दिखा । कल फिर दिखा । मगर इस बार उसने दाढी बढा ली थी और लंबा कुरता पहन रखा था । मैंने पूछा , '' कहाँ रहे ? और यह दाढी क्यों बढा रखी है ? '' उसने जवाब दिया , '' बाहर गया था । '' दाढीवाले सवाल का उसने जवाब यह दिया कि दाढी पर हाथ फेरने लगा । मैंने कहा , '' आज तुम टार्च नहीं बेच रहे हो ? '' उसने कहा , '' वह काम बंद कर दिया । अब तो आत्मा के भीतर टार्च जल उठा है । ये ' सूरजछाप ' टार्च अब व्यर्थ मालूम होते हैं । '' मैंने कहा , '' तुम शायद संन्यास ले रहे हो । जिसकी आत्मा में प्रकाश फैल जाता है , वह इसी तरह हरामखोरी पर उतर आता है । किससे दीक्षा ले आए ? '' मेरी बात से उसे पीडा हुई । उसने कहा , '' ऐसे कठोर वचन मत बोलिए । आत्मा सबकी एक है । मेरी आत्मा को चोट पहुँचाकर...

कनफ्यूज़न और कांग्रेस

हिन्दुस्तान की आजादी की लडाई का जिनने नेतृत्व किया वे सभी नेता उच्च वर्ग से थे.  कोई पी सी एस था को बड़े व्यापारी का पुत्र था कोई वकील था और कोई वजीर का बेटा लगभग सभी उच्च जातियों के शहरी लोग थे !!  इन्होने गरीब, कुचले हुए ग्रामीणों को एकत्र कर के ४ दशक संघर्ष किया और आज़ादी हासिल की !! कहने का आशय यह है की सुधार या परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है जो ऊपर से शुरू होकर नीचे जाती है !! कोई भी परिवर्तन एक ही दिन में नहीं होता, चाहे वो छोटी सी संस्था हो, राजनैतिक पार्टी हो या देश !! सम्पूर्ण परिवर्तन जिसे हम आमूलचूल परिवर्तन कहते है ; ये एक स्वप्न जैसा है जो असंभव के काफी करीब है.  परिवर्तन तब ग्राह्य है जब मिसाल पेश की जाये; जब आदर्श सामने रखे जायें !! मोदी के पास एक मिसाल है "गुजरात विकास" की, छवि है एक निर्भीक नेता की, हो सकता है ये सब झूठ हो भ्रम हो पर कुछ है तो सही !!  कांग्रेस के पास क्या है ; एक नेता जिसको एक मेंटर की जरूरत है, जिसके पास दिखाने को अपनी एक भी उपलब्धि नहीं !! रायबरेली और अमेठी से लेकर लखनऊ इलाहाबाद तक में पार्ट...

कांग्रेस : कुतर्कों का महिमा मंडन

कांग्रेस : कुतर्कों का महिमा मंडन  कुछ प्रश्न उमड़ घुमड़ के मन में धमाचौकड़ी मचाये हुए थे. और जिज्ञासा को शांत करना मनुष्य की स्वाभाविक प्रकृति है. बहुत सारे राजनैतिक, पत्रकार और पदाधिकारी मित्रों से मैंने ये कुप्रश्न किये, पेश है उनकी एक बानगी. प्रश्न१- कांग्रेस देश की सबसे बड़ी और पूरे देश में जनाधार रखने वाली पार्टी है,  फिर सरकार बनाने में इतनी दिक्कत क्यों? उत्तर - ये आपस में लड़ना तो बंद करें. प्रश्न१-अ : बीजेपी में भी तो गुटीय संघर्ष है ? उत्तर - कम है इतना नहीं है, संघ और बीजेपी के बड़े नेता इस पर नियंत्रण रखते हैं. प्रश्न१ -ब : कांग्रेस में तो बीजेपी से बड़े और ज्यादा चमक वाले नेता हैं जो ज्यादा सक्षम हैं ? उत्तर - हैं तो !! पर मुद्दे कहाँ हैं, विचार धारा कहाँ है ? प्रश्न१-स- वाह भाई वाह, धर्मनिर्पेक्षता और कांग्रेस का इतिहास ? उत्तर- इतिहास सुनना कौन चाहता है ? आप सुनेंगे क्या निजाम हैदराबाद के वंशजो से या महाराणा प्रताप के वंशजो से, उनके पूर्वजों की कहानी ? वाजिद अली शाह के वंशज से फ़ोन पर बात कराऊँ? मैं बोला : न बाबा न मुझे ...

गुरु

जी हाँ हम सभी के जीवन में हर जगह, किसी न किसी रूप में पूजनीय और प्रेरणादायी ब्यक्तित्व "गुरु" के रूप में उपलब्ध होते ही है जो जीवन में हमेशा एक नयी उर्जा का संचार कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते है I ऐसे महान व्यक्तित्वों का दिन तो हर रोज ही है! नमन उन सभी ब्याक्तित्वों को जिन्होंने हमें इस धरती पर चलना, बोलना, पढना, सोचना और समझना सिखाया क्योंकि आज हम जहाँ भी है जैसे भी है उनके बदौलत ही तो है! दरअसल गुरु को अनेको उपाधियाँ इसी लिए तो दी गयी है क्योंकि मानव के जीवन में गुरु की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है I हकीकत में गुरु के मार्गदर्शन से ही कम समय में व्यक्ति अपनी मनोकामनाएं पूरी कर लेता है I गुरु का दायरा सिर्फ स्कूली दिनों में शिक्षा देने तक ही सीमित  नहीं बल्कि काफी विस्तृत होता हैI जो अनेको रूपों में जीवन भर साथ देता है! जहाँ एक माँ भी गुरु ही होती है जो अपने बच्चे को ऊँगली पकड़ कर पहला कदम धरती पर रखना सिखाती है I वहीँ उन अनेको रिश्तों एवं सामाजिक सरोकारों को भी गुरु के नजरिये से देखा जाता है, जो समय समय पर इन्सान को मार्गदर्शन देने और ...

एक था राजा...

एक था राजा जिसकी संतान नहीं थी.  उसने विचार किया और निर्णय लिया कि राज्य के सबसे कमज़ोर और गरीब आदमी को मैं, "राज पाठ सौंपकर संन्यास ले लूँ" राजा ने मुनादी करवा दी.  सेनापति एक कमज़ोर साधू को पकड़ लाये. राजा : तुम्हारे पास कितनी संम्पत्ति है. साधू : सिर्फ कमंडल है. राजा : और ताकत. साधू : घसीट घसीट के चल लेता हूँ. राजा : मैं तुम्हें इस राज्य का राजा बनाता हूँ. साधू : नहीं महाराज नहीं.... राजा उस साधू का बलपूर्वक राजतिलक कर देता है.  साधू राजा मंत्रियों को बुलाकर राज्य में...  मुफ्त अनाज बत्वाना शुरू कर देता है. कुछ दिन बाद साइकिलें बंटाना शुरू करता है. फिर गायें और बैल बांटता है.... एक दिन कोषाध्यक्ष आ कर राजा से कहता है.... महाराज अब तो राजकोष ख़त्म हो गया है अब ये मुफ्त आवंटन कैसे होगा... बताएं महाराज मैं क्या करूं... राजा : राजसी वस्त्र उतार कर भगवा वस्त्र  धारण कर लेता है और कहता है....    जाओ कोषाध्यक्ष... जाकर मेरा कमंडल लाओ. ;-) (जांजगीर के एक मित्र द्वारा यह कहानी नवीन टाइल्स कोरबा में सुनाई गयी.)