राजनीति और आदर्शों का घालमेल


#मोदी_शाह_और_आरएसएस

2 साल पुरानी पोस्ट ....
1- राजनीति में कभी कुछ भी सही तरीके से किया ही नही जा सकता ।
आदर्शवादी तरीके से राजनीति असम्भव है।
विरोधी को छकाना, भ्रमित करना और उसे वस्तु स्तिथि से अवगत होने से पहले जमीन सुंघा देना ही तो राजनीति है, बल्कि यही जीवन है।
2- अगर आप विरोधी की अगली चाल भांप लेते हैं तो आप विश्वविजेता हो सकते हैं।
अगर आप विरोधी के चाल चलने के पश्चात उसका तोड़ सोच लेते हैं तो आप विजेता हैं पर अगर आप विरोधी की चाल नही समझ पाते या उसे गम्भीरता से नही लेते तो आप हारने के लिए ही पैदा हुए हैं ।।
3- राजनीति में अच्छे उद्देश्य के लिए गलत तरीके स्तेमाल करना मजबूरी है, पर वह तरीके अगर सार्वजनिक हो जाये तो यह अज्ञानता कहलाएगी।
नेता/राजा और जनता/प्रजा दो अलग अलग स्तर के दिमाग होते हैं।
पहला दिमाग वह जो अपने महान उद्देश्य के लिए हर कोशिश करता रहे पर दूसरा वह ही देख पाता है जो उसे पहला दिखाये।
4- नेता या राजा कभी 1 विजय से महान नही कहलाता उसे सैकड़ो छोटी छोटी जीतो का गुलदस्ता बनाना होता है जिसे बाद में जनता या प्रजा खुद सभी जीतो को सम्मलित मान महान कहने लगती है।
यही हो रहा है - 1- थरूर के विदेशी सम्बन्धो का उपयोग मोदी विरोध में न हो इसलिए थरूर को सुनंदा के मामले में व्यस्त किया गया।
2-लालू के अहमकाना अंदाज़ का फायदा विरोधियो को न मिले इसलिए लालू को टांगा गया।
3- विपक्षियो में भय का संचार हो इसलिए शिवकुमार और अहमद पटेल को झंकझोर के छोड़ दिया गया।
4- मुलायम हो या शरद पवार सब सनाके मे हैं।
5- जे एन यू, कश्मीरी पंडित , डॉ नारंग और अखलाख मामले से कश्मीर, कैराना और ममता के बंगाल में माहौल बनाया गया ।।
6- अहमद पटेल के चुनाव की आड़ में 7 एम एल सी यू पी में तोड़ दिए गए।
7- केजरीवाल के पीछे माहौल बनाते बनाते दिल्ली को कांग्रेस विहीन कर दिया गया।
कॉंग्रेस के पास दिल्ली में यदि कोई सबसे बड़ा संवैधानिक पद है तो वह है पार्षद का।।
बिल्कुल वही हो रहा है जो दंगल फ़िल्म की आखिरी कुश्ती के आखिरी 1 मिनिट में हुआ था।
अब मोदी को भ्रष्टाचार के आरोप में किसी अपने को शहीद करना है, यह अति सम्भव है।।
सतर्क रहें,
अगस्त के महीने की #स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महराज की #हथौड़ा_पोस्ट

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