हाँ मैं ब्राम्हण हूँ

हाँ मैं ब्राम्हण हूँ, निश्चल हूँ, निष्काम हूँ, निष्पक्ष हूँ,निष्पाप हूँ । हाँ मैं #ब्राम्हण हूँ हाँ मैं #विप्र हूँ।।

कमजोर इतना हूँ कि सबको माफ कर देता हूँ ।
लालची इतना हूँ कि चन्द्रगुप्त को राजा बना देता हूँ ।

डरपोक हूँ,
इसलिए तो पृथ्वी को इक्कीस बार अत्याचारियों से मुक्त करता हूं ।

अनुपयोगी भी हूँ ,तभी तो हड्डियों से वजृ बनवाता हूँ ।

अनपढ हूँ, क्योंकि व्याकरण और गणित को खोज कर लाता हूँ ।

जातिवादी हूँ,
माया,मुलायम,कांग्रेस,भाजपा....पता नहीं कितनो के साथ हूँ ।

आरक्षण का विरोध नहीं करता ,क्योंकि अपनों के ही नाराज होने का डर है।
सरकार से कुछ नहीं मांगता,क्योंकि हिन्दूस्तान कमजोर होने का डर है ।।

बंगलादेश,पाकिस्तान से गायब हूँ, काश्मीर से निष्कासित हूँ ।
फिर भी अखंड भारत का स्वपन देखता हूँ ।

कदम कदम पर ठगा जाता हूँ, फिर भी सर्वे भवंतु सुखिनः का मंत्र गुनगुनाता हूँ ।।क्योंकि .....मैं ब्राम्हण हूँ ।।

इन उच्च जातियों में ऊँचा क्या है  ? संविधान जवाब दे !!!

प्रश्न ये है कि ब्राह्मणों को किस आधार पर ऊँची जाति वाला बोल कर सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है, आज के दौर में ऐसा क्या है ब्राह्मणों में , जो ऊँचा है, सरकारों को ये भी खुलासा करना चाहिए। जबकि ब्राह्मण अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं ।अगर पाठ पूजा करना , पंचांग पढ़ना , हवन करवाना उनके पौराणिक व्यवसाय के कारण सवर्ण जाति कहलाता है, तो मैं बताना चाहता हूँ कि आजकल मंदिर के पुरोहित मंदिर कमेटी के अधीन नौकरी करते हैं ,जिन्हें बहुत ही अल्प वेतन पर रखा  जाता है और मंदिर-कमेटी के सदस्यों के दबाव में रहना पड़ता है। कई पुजारियों पर अब तो  गाली भी पड़ने लगी है , फिर किस प्रकार ब्राह्मण को उच्च बोल कर सरकारी नौकरी में / सरकारी स्कूल में / सरकारी स्कीमों में किसी प्रकार की छूट नही दी जाती ।

ब्राह्मणों की नई पीढ़ी जिन्हें किसी परीक्षा या इंटरब्यू मे कोई रियायत नही मिलती,तो वे अपने पूर्वजों को कोसते हैं कि क्या इस संविधान ने अरबों तुर्कों मुग़लों,पुर्तगालियों के जुल्म सहने का इनाम ,तुर्कों मुगलों द्वारा जब ब्राह्मणो को काटा जाता था(मु. बिन कासिम-सिंध में 14 वर्ष से ऊपर के सभी ब्राह्मणों के कत्ल का आदेश, औरंगजेब द्वारा प्रति दिन सवा मन जनेऊ को तौलने का आदेश- कत्ल या धर्मांतरण द्वारा,पुर्तगालियों द्वारा गोवा में नरसंहार आदि आदि),वेद पुराण ग्रंथों को जलाया जाता था, तो ब्राह्मण ही था जिसे वेद पुराण कंठस्थ थे और जो जुल्म सहन करता हुआ भी छुप छुप कर अपने बच्चों को मंत्र   वेद उपनिषद 16 संस्कार आदि सिखाता रहाथा ,ताकि अपने देश की संस्कृति जिन्दा रह सके और हिन्दू धर्म को बचाया जा सके |जबकि एक हज़ार वर्ष तुर्कों मुगलों और 200 वर्षों अंग्रेज़ों के जुल्म के बावजूद भारतीयों को हिन्दू बनाये रखा और आज उन्ही ब्राह्मणो के खिलाफ साजिशें और अपमान हो रहा है।

हम ब्राह्मण कोई विशेष सम्मान नहीं चाहते ,परन्तु कम से कम सरकारी स्कीमों या निजी कार्य में बराबरी तो मिले , ये कैसी उच्च जाति व्यवस्था है कि उच्च बोल कर प्रताड़ित किया जा रहा रहा है !!!

सरकारें केवल इतना जवाब दे दें - ब्राह्मण / क्षत्रिय / वैश्यों में ऊँचा क्या है और इसका  आधार क्या है ???
इस व्यवस्था ने हमें मजबूर कर दिया है कि हम ब्राह्मण समाज को एकजुट करें और इस व्यवस्था को खत्म करें।

🙏 निवेदन
वन्देमातरम्।
जय श्री राम, जय परशुराम।।
🌹🙏🏻

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