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डरपोंक गांधी ?

कांग्रेस पर यह लेख मेरे स्वयं के विचार हैं और हर उस व्यक्ति, संस्था, संगठन एवं कंपनी को मैं इसे शेयर करने व छापने का अधिकार इस बाध्यता के साथ देता हूँ कि वे इस लेख की आत्मा के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे !! अवस्थी सचिन ----------------------------- कांग्रेस भारत का सबसे पुराना राजनैतिक दल है ; वह दल जिसके सबसे बड़े नेता मोहनदास करमचंद गांधी को भी उनके जीवित रहते उनके ही साथीयो ने चुनौती दी और गांधी ने उस चुनौती को खुले दिल से स्वीकार किया और नेताजी ने जिस चुनाव में गांधी के प्रत्याशी को पूर्ण बहुमत से हराया उस चुनाव को जीतने के बाद भी गांधी को दुखी देखकर नेता जी ने गांधी के चरणों में अपनी जीत की माला डाल दी थी ! जबकि वे पूर्ण बहुमत से चुने हुए अध्यक्ष थे !! आज वही कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष का तो छोड़ दें प्रदेश और जिला अध्यक्ष का निष्पक्ष चुनाव नहीं करवा पा रही ! क्या हो गया है कांग्रेस को ? नेहरु के सामने उनकी पार्टी में ही कई चुनौतियां आईं और वे हर बार उस चुनौतियों से लडे और जीते ! नेहरू के बाद इंदिरा ने काफी कमज़ोर शुरुवात की और इंदिरा ने उस मुकाम को हासिल किया जिस मुकाम पर लोग...

बीजेपी हिन्दू वादी तो क्या कांग्रेस मुस्लिम वादी

चलो मान लिया बीजेपी हिंदूवादी पार्टी है ! बीजेपी सांप्रदायिक और आपकी नज़र के हिसाब से फासिस्ट पार्टी भी है ! मोदी शहंशाह हैं, ये भी मान लेते हैं, हत्यारा भी मान लेते हैं और जो कहो सब मान लेते हैं !! पर आप बताओ आप क्या हो ? इशरत एनकाउंटर भी सच साबित हुआ। बाटला एनकाउंटर भी सच साबित हुआ। अब बाकायदा जांच के बाद साबित हुआ कि फ्रिज में गाय का मांस ही था। शायद इसीलिए परिवार वाले सीबीआई जांच से मुकर गये थे। खैर उपरोक्त तीनों घटनाओं को झूठा साबित करने की कोशिश की गई। किसलिए वोटों के लिये। वोटबैंक के लिये? ये लोकतंत्र है? पर मेरा प्रश्न भी सुन लेते और उत्तर दे देते तो बड़ी कृपा होती ? क्या आप हिन्दू विरोधी पार्टी नहीं हो ? क्या आप वोटों के लिए फासिज़्म नहीं फैला रहे ? अमित शाह कहते हैं अखलाक को जान से मार देना कहीं से भी न्याय संगत नहीं था। पर क्या सैकड़ो सिक्खो की हत्या के बाद *किसी* ने कहा था, की जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है ? खैर यह भी छोटी सी बात है - बड़ी बात यह है की आपको हिंदी नहीं आती तो इतने बड़े बड़े शब्द आपके मुंह में ठूंसता कौन है ? वो कौन है जो आपको यह समझाता है की जो...

भारत : हिन्दुस्तान : इंडिया २०१४

बड़ा जांझवाती चुनाव है ये - मोदी बनाम राहुल गांधी / गांधी नेहरू बनाम सरदार पटेल - मंहगाई बनाम - आशाएं / बहुसंख्यक बनाम - अल्पसंख्यक / भ्रष्टाचार बनाम - सुशासन / जीत पर जान लगी है सबकी !! अटकलें, अफवाहें, झूठ, फरेब, पैसा, प्रतिष्ठा, कमीनापन, सच्चाई सब दाँव पर है !! कई टीमों के बीच ५ वर्ष में एक बार होने वाला कुर्सी कप इस बार फिक्स हैं !! २ टीम हैं एक मोदी की और एक विरोधी टीम जिसमे सपा, बसपा, लालू, नितीश ममता और न जाने कौन कौन खिलाडी हैं !! दूसरी टीम में एक और उप टीम थी जो पार्टी के लिए चुनाव नहीं लड़ रही हैं और चुनाव का सिर्फ मज़ा ले रही हैं या सिर्फ अपनी सीट जीतने की कोशिश में मशगूल हैं !! उसका काम था की किसी भी तरह ये वर्त्तमान सरकार निपटे और हम पार्टी आला कमान या चुनाव प्रबंधक की टांग खींच कर खुद पार्टी पे कब्ज़ा करें !! ये रणनीति पिछले CWG घोटाले के बाद से बन रही थी !! कांग्रेस की वास्तविक स्तिथि इतनी बुरी कभी नहीं रही न ही बीजेपी की इतनी बढ़िया या यूँ कहें की किसी व्यक्ति विशेष की बीजेपी में !! इसे सभी बीजेपी विरोधी, बीजेपी का कांग्रेसी करण मानते हैं ; ...

!!गाँधी के उत्तराधिकारियों से प्रश्न !!

मैं संघी - कांग्रेसी - आरक्षण विरोधी - आरक्षण के पक्षधर - समाजवादी - बीजेपी और आर टी आई एक्टिविस्ट्स के साथ रहा और उनको समझने की भरपूर कोशिश की !! अलग अलग विचार धाराओं को जानने समझने के प्रयास में सिर्फ एक चीज़ समझ पाया कि सत्ता के गलियारों तक पहुँचने के लिए जो रास्ते जाते हैं ; उन पर आने वाला हर गतिरोध आपका दुश्मन है और हर घाट आपका मित्र - मित्र इसलिए क्योंकि वो गंतव्य तक पहुँचाने वाली आपकी गति में वृद्धि करता है !! पर वर्त्तमान राजनीती में परंपरागत गतिरोध और घाट बदल गए हैं - पहले ये महगाई, गरीबी, शिक्षा, सीमा की सुरक्षा और सिंचाई के साधन होते थे !! अब ये साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार पर आ कर थम गए हैं !! लगता नहीं की थर्ड फ्रंट, कांग्रेस और कम्युनिस्ट इन पुराने मापदंडों पर यकीन करते हैं !! बीजेपी शायद इन पुराने मापदंडों पर अभी भी विश्वास करती है इसलिए गुजरात का विकास मॉडल - सरदार पटेल की मूर्ति के साथ साथ नए मुद्दे जैसे भ्रस्टाचार और गुजरात में गोधरा के बाद की शांति का भी जिक्र करती है !! ये समझ में नहीं आता कि १२५ साल पुराणी कांग्रेस और उसके साथ जुडी थर्ड फ्रंट के घाघ...

लोकसभा : २०१४

वि. स. चुनाव ख़त्म हुए - लोकसभा चुनावों कि रणभेरी बजने लगी है !! परिणाम शानदार रहे हैं - जे पी के बाद कुछ ताज़ी बयार चली है !!  बी जे पी और कांग्रेस के पैरो तले जमीन खिसकी हुयी है - सच कहें तो ये नेताओं के लिए विश्वसनीयता का सन्कट है !!  इस संकट से उबरने के लिए सिर्फ विश्वसनीयता की जरूरत है - आप कितने भी चतुर पैतरे बाज़ कौटिल्य या विदुर हों अगर आप विश्वसनीय नहीं है तो आप संकट में हैं !!  ये नेताओ को समझ में आ गया है, वे सिर जोड़ के मंथन कर रहे हैं ; नए पैतरे सोच रहे हैं ,   अब अशोक रोड का दफ्तर हो या अकबर रोड का सभी एक ही बात पर चिंतन कर रहे हैं !! जनता भी चिंतन कर रही है, वह कम बुरे और ज्यादा बुरे में कम बुरे को चुन रही है या किसी नयी पार्टी को विकल्प बनाना चाह रही है !! दिल्ली के विधान सभा चुनावों में जो हुआ वह लोकसभा में होगा ऐसा नहीं है - शहरी मतदाता "आप" को वोट कर सकते हैं - पड़े लिखे ग्रामीण मतदाता भी आप कि तरफ आकर्षित हो सकते हैं ; पर आज भी भारत की ८०% लोकसभाओं की ७०% जनता ग्रामीण है, और ग्रामीण जनता "आप" से ज्यादा परचित नहीं है ; विधान सभा च...

टार्च बेचनेवाले : श्री हरिशंकर परसाई

वह पहले चौराहों पर बिजली के टार्च बेचा करता था । बीच में कुछ दिन वह नहीं दिखा । कल फिर दिखा । मगर इस बार उसने दाढी बढा ली थी और लंबा कुरता पहन रखा था । मैंने पूछा , '' कहाँ रहे ? और यह दाढी क्यों बढा रखी है ? '' उसने जवाब दिया , '' बाहर गया था । '' दाढीवाले सवाल का उसने जवाब यह दिया कि दाढी पर हाथ फेरने लगा । मैंने कहा , '' आज तुम टार्च नहीं बेच रहे हो ? '' उसने कहा , '' वह काम बंद कर दिया । अब तो आत्मा के भीतर टार्च जल उठा है । ये ' सूरजछाप ' टार्च अब व्यर्थ मालूम होते हैं । '' मैंने कहा , '' तुम शायद संन्यास ले रहे हो । जिसकी आत्मा में प्रकाश फैल जाता है , वह इसी तरह हरामखोरी पर उतर आता है । किससे दीक्षा ले आए ? '' मेरी बात से उसे पीडा हुई । उसने कहा , '' ऐसे कठोर वचन मत बोलिए । आत्मा सबकी एक है । मेरी आत्मा को चोट पहुँचाकर...

कनफ्यूज़न और कांग्रेस

हिन्दुस्तान की आजादी की लडाई का जिनने नेतृत्व किया वे सभी नेता उच्च वर्ग से थे.  कोई पी सी एस था को बड़े व्यापारी का पुत्र था कोई वकील था और कोई वजीर का बेटा लगभग सभी उच्च जातियों के शहरी लोग थे !!  इन्होने गरीब, कुचले हुए ग्रामीणों को एकत्र कर के ४ दशक संघर्ष किया और आज़ादी हासिल की !! कहने का आशय यह है की सुधार या परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है जो ऊपर से शुरू होकर नीचे जाती है !! कोई भी परिवर्तन एक ही दिन में नहीं होता, चाहे वो छोटी सी संस्था हो, राजनैतिक पार्टी हो या देश !! सम्पूर्ण परिवर्तन जिसे हम आमूलचूल परिवर्तन कहते है ; ये एक स्वप्न जैसा है जो असंभव के काफी करीब है.  परिवर्तन तब ग्राह्य है जब मिसाल पेश की जाये; जब आदर्श सामने रखे जायें !! मोदी के पास एक मिसाल है "गुजरात विकास" की, छवि है एक निर्भीक नेता की, हो सकता है ये सब झूठ हो भ्रम हो पर कुछ है तो सही !!  कांग्रेस के पास क्या है ; एक नेता जिसको एक मेंटर की जरूरत है, जिसके पास दिखाने को अपनी एक भी उपलब्धि नहीं !! रायबरेली और अमेठी से लेकर लखनऊ इलाहाबाद तक में पार्ट...