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संदेश

सामाजिक संरचना, टिकाऊ जीवन और संवैधानिक संस्थाएं

आज का प्रश्न ✔️ १- क्या स्त्री और पुरुष, गाय और बैल या शेर और शेरनी एक बराबर हो सकते हैं? २- क्या दोनो की मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक क्षमताएं व कार्यशैली समान हो सकती है? 3- क्या वे एक परिस्तिथि में एक समान निर्णय ले सकते हैं? प्रश्न का उत्तर #हाँ_या_न में देना हो तो उत्तर न में ही आएगा। पर कुछ लोग लेकिन, किंतु, बट, परंतु का उपयोग कर घंटो टाइम पास कर सकते हैं पर यह वे भी जानते हैं कि यह लेकिन और किंतु व्यर्थ की बकवास के सिवा कुछ नहीं है। नर प्रजातियें जो पशु योनि से जन्म लेती हैं स्त्री के साथ वैसा ही बर्ताव करती हैं जैसा पुरातन पुरुष। ईश्वर ने भी महिलाओं को, बच्चो समाज और परिवार के लिए #समर्पित बनाया है और पुरुषों को #उच्छंखल । ऐसा क्यूँ? मानव इतिहास में समाजीकरण एक वृहद विषय है। कोई भी पशु (मानव, पशुश्रेष्ठ है) चाहे वह स्त्री हो या पुरुष स्वावलम्बी होता है, पर महिला पशु स्वावलम्बी से ज्यादा होती है, वह बच्चों के उदरपोषण, सुरक्षा और उन्नयन के लिए भी समर्पित होती है। जबकि पुरुष पशु उच्छ्रंखल होता है वह स्वार्थी और कामुक होता है। मानव सामाजिक जीवन मे यह क्रम टूटा है इसे ट...

निवेदन

भारतीय राजनीती भारतीय राजनीती के बारे में बहुत कुछ लिखा एवं पढ़ गया है. विभिन्न विचारको ने, मूर्धन्य पंडितों ने इस पर अपने अपने विचार दिए हैं. मेरे जैसा अल्पज्ञानी और अल्प राजनैतिक व्यक्ति (अल्प राजनैतिक इसलिए कि मुझे आज तक किसी राजनैतिक पद ने वरन नही किया है) इस पर कुछ लिखना चाहता है, अगर मेरी कुछ टिप्पनियाँ किसी को चोट पहुंचती है तो कृपया मुझे अभय दान दे जिस से में बेबाक लेखन कर सकूं. आपका अपना ही अवस्थी.एस

बिहेवियरल इकोनॉमिक्स

*बिहेवियरल इकोनॉमिक्स, जिसके लिए इस वर्ष रिचर्ड एच थेलर को नोबेल पुरस्कार मिला है, बड़ी दिलचस्प चीज़ है.* इसकी ब्रीफिंग पेश है पैसों के मामले में लोग सिर्फ दिमाग से फैसले नहीं लेते. अक्सर इंसानी जज्बात दिमाग पर हावी हो जाते हैं , इसलिए *आर्थिक मामलों को समझने के लिए अर्थशास्त्र के साथ मनोविज्ञान को समझने की भी जरूरत है.* यही बिहेवियरल इकोनॉमिक्स कहलाता है. पैसे के साथ इंसान का रिश्ता उलझा हुआ है.  लालच, भविष्य का डर और खर्च करने से पैदा होने वाला अपराध बोध ऐसे जज्बात हैं जो इस उलझन को और बढ़ाते हैं. *बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के जरिए हम पैसे से जुड़ी आदतों को समझने की कोशिश करते हैं* इनमे से कुछ आदतों के बारे में आप भी जानिए  1. *'पेन ऑफ  पेइंग'* विद्वान मानते हैं कि पैसे को जब हम अपनी जेब से जुदा करते हैं, तो हमें  तकलीफ होती है,यह तकलीफ तब ज्यादा होती है ,जब हम नोटों की शक्ल में पैसा दे रहे हों. क्रेडिट कार्ड या उधार माल खरीदते वक्त यह तकलीफ कम हो जाती है. यही कारण है किस्तों में उधार सामान खरीदते या क्रेडिट कार्ड के जरिए खर्च करते  वक्त लोग कई बार गैर जरूर...

ब्राह्मणत्व के खिलाफ वामपंथी षड्यन्त्र

वामपंथीयो ने ऐसा इतिहास बदला कि सबकी मति पर पर्दा पड़ गया । ब्राह्मण सिर्फ पूजा पाठ करते थे। तो मंगल पांडेय कौन थे, चंद्र शेखर आज़ाद कौन थे? ब्राह्मण भीख मांग के खाते थे तो पेशवा कौन थे? शूद्र जातियों का दमन होता था तो रानी दुर्गावती राजा मदन और गौंड राजा कौन थे? दलित ज्ञान से वंचित रखे जाते थे तो रैदास और घासी दास कैसे ज्ञानी और सम्मानीय हुए? मुझे लगता है यह ऐसी कर्माधारित व्यवस्था थी जिसे अगर कोई चाहे,  तो छोड़कर अपनी योग्यता के आधार पर दूसरी व्यवस्था में जा सकता था। ऐसा ही था जो बाजीराव क्षत्रियों का काम कर रहे थे । महिलाओं के शोषण के आरोप हिन्दू समाज पर लगाए जाते हैं, वामपंथी इसके लिए महिला सशक्तिकरण के आंदोलन चलाते हैं। पर जब मैं इतिहास पढ़ता हूँ तो मुझे कृष्ण की पत्नी रुक्मणि दिखती है, सीता का स्वयंवर दिखता है, माता सति का भगवान शंकर के लिए अपने पिता के खिलाफ किया आत्मदाह दिखता है। वामपंथी कहते हैं हम ब्राह्मण असहिष्णु थे,  तो कैसे इसी व्यवस्था से,  गुरुनानक देव जी ने नया धर्म खड़ा किया और इसी व्यवस्था से जैन और बौद्ध बने, इसी व्यवस्था ने पारसियों, मुसलमानों और ईसाइयों क...

सनातन का कोरोना कनेक्शन

इन पर ध्यान दें : 👇 नमस्ते छुआछूत सोला वानप्रस्थ सूतक दाह संस्कार शाकाहार समुद्र पार न करना विदेश यात्रा के बाद पूरा एक चन्द्र पक्ष गांव से बाहर रहना घर मे आने से पहले हाँथ पैर धोना बाथरूम और टॉयलेट घर के बाहर बनवाना वैदिक स्नान की विधि और इसे कब कब करने है यह परंपरा ध्यान दें, हमारे ईश्वर के स्वास्थ्य खराब होने पर उनकी परिचर्या #यह वे चीज़े हैं जो मुझे याद आ रहीं हैं। आप बुजुर्गो से पूछेंगे तो और भी चीजे आपको मिलेंगी। यह हम भूल चुके हैं क्योंकि एन्टी बायोटिक, साबुन, और सेनिटाइजर बाजार में आ गए और औद्योगिक क्रांति को  मानवीय संसाधनों की जरूरत थी। आज हमें फिर वही परम्पराए नाम बदल बदल कर याद दिलाई जा रहीं है। #सोशल_डिस्टेंसिंग #क्लींलिनेस बुजुर्गो की कम इम्युनिटी आदि आदि। वानप्रस्थ आश्रम का उद्देश्य ही यह था कि वायरस बुजुर्गो पर जल्द प्रश्रय पा जाता है, फिर मजबूत होकर जवानों पर हमला करता है, इसलिए कमजोर इम्युनिटी के लोगो को वन भेज दिया जाता था।। निष्कर्ष : आना दुनिया को वहीं है जहां से हम चले थे। यही सनातन है। यह प्रकृति का संविधान है। #स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

राजनीति और धर्म Vs नेता और धर्मगुरु

अंग्रेज़ो को न तो धर्म गुरु पसंद थे न ही ब्राह्मण । अंग्रेज़ो ने 2 व्यवस्थाएं दीं,  1- वैकल्पिक ब्राह्मण 2- वैकल्पिक धर्म गुरु A- वैकल्पिक ब्राह्मणों का काम था, जातिगत ब्राह्मणों के समान न्याय करना और प्रशासन चलाना। B- वैकल्पिक धर्मगुरुओ का काम था संसद को नेतृत्व देना । व्यवस्थाएं तो अंग्रेज़ो ने ठीक ही दी बस एक कमी रह गयी वह थी, ब्राह्मणों के समान आदर्श और बिना अर्थ लाभ के शासन चलाने के गुर वह वैकल्पिक समाज को न दे पाए। और यहीं से शुरू हुआ, #भ्रष्टाचार #ताकत और #अनैतिकता का खेल ।। संसद को नेतृत्व देने वाले (मंत्री परिषद और राष्ट्रपति) वैकल्पिक धर्म गुरु हो या प्रशासन चलाने या न्याय करने वाले वैकल्पिक ब्राह्मण, सभी 200% भ्रष्ट और काइयां है। क्यूं? कभी आपने सोचा ? इसका सिर्फ एक ही कारण है कि अंग्रेज़ो ने इन वैकल्पिक सत्ताधारियो को अधिकार तो पूरे दिए पर, ब्राह्मणों के समान भिक्षा मांग के भोजन, कुटिया में चुटिया के साथ निवास, स्वर्ण और रथ के उपयोग पर पाबंदी एवम शराब और मांस से परहेज के नियम नही बनाये। बस यहीं से शुरू हुआ हमारा पतन। वैकल्पिक ब्राह्मण (नेता, न्यायाधीश और अधिकारी) पर अगर आज ...

चीन की न 🤔

चीन और उसकी "न" कहने की शक्ति !! एक नयी बात और ऐसी भी की दिमाग जिंझोड दे !! शक्ति चीज़ो को नकारने की आपकी क्षमता से परिभाषित होती है ! जैसा की शाश्वत सत्य है ; एक ५ किलो की वस्तु अपनी जगह पड़ी रहना चाहती है और आप उसकी इक्षा के विरुद्ध उसकी मंशा को नकारते हुए उसे  स्थान पर पदस्थापित कर दें तो ये आपकी ताकत हुयी ! किसी के न चाहते हुए भी उससे अपने मन का काम ले लेना "ताकत" है ! ये भूमिका आगे के लेख के सन्दर्भ में है !! मैंने १ माह पहले एक सी डी एम ए मोबाइल का अधिग्रहण किया ; जैसा की  सब जानते हैं सी डी एम ए स्मार्ट फ़ोन वो भी ड्यूल सिम आसानी से मिलना मुश्किल है ! ये सेट चीनी कंपनी जेड टी ई का है जो मोबाइल के बी टी एस बनाती है ! आश्चर्य जनक रूप से इस सेट में ढेरों कमियां और दोष थे ! जी पी इस ठीक काम नहीं करता था ; जी एस एम सिम में सिग्नल की समस्या थी ; बैटरी कमजोर थी ; मैंने इस मोबाइल के एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम को रुट करने का मन बनाया ; कुछ सुधर हुआ पर मैं संतुष्ट नहीं था ; काफी आर एंड डी के बाद मुझे एक चीनी (चाइना मोबाइल कंपनी) रोम मिली ; जब मैंने उसे इंस्टॉल किय...