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ब्राह्मणत्व Vs जंगलराज

होली और भांग : भंग की तरंग में मैने स्वप्न देखा - जो नीचे वर्णित है - ध्यान से पढ़ें इस व्यंग को ।। 4 गिलास ठंडाई, 2 चम्मच माज़ूम और 1 पाँव भांग के पकौड़े के बाद जब सच्चिदानंदन जी महाराज सोये तो उन्हें एक भयानक प्रजातान्त्रिक स्वप्न दिखा। दृश्य 1 -  घमासान चल रहा है कहीं जाट लड़ रहे हैं, कहीं पटेल युद्ध कर रहे हैं, कहीं देश द्रोही नारे लग रहे हैं तो कहीं, नेता जानवरो को पीट रहे हैं तो कहीं नेता पुत्र बलात्कार कर रहे हैं, कहीं हत्या और कुटिलता के प्रपंच रचे जा रहे हैं, कहीं नकली साधू जटा धारी चिलम चढ़ाये बैठे हैं। दृश्य 2 -  1 ब्राह्मण सफ़ेद धोती पहने चुटिया रखे खुले तन से बहते जल में सूर्य को अर्घ दे धीरे धीरे बाहर निकल रहा है । मैं - उस ब्राह्मण को रोक कर बैठ जाते है और पूछते हैं - महाराज ये समाज में हो क्या रहा है? आप सूर्य उपासना कर रहे हो और देश जल रहा है, आग लगी है देश में । ब्राह्मण मुस्कुराये - कह उठे राज मिस्त्री को, टीवी मेकेनिक का काम दोगे तो ऐसा होगा ही। वो रांगे की जगह सीमेंट और मल्टी मीटर की जगह साहुल तो लगाएगा ही। अगर मिस्त्री कुछ करता हुआ न दिखेगा तो उसस...

मोदी का अगला क़दम : जातिगत विघटन नहीं अपितु आर्थिक विषमता का फ़ायदा उठाना है !!

दलित राजनीति हो समाजवाद या सर्वजन हिताय की अवधारणा लिए हुए देश - उनको चलाने का काम तो वही कर सकता है जो समर्थ हो ! किराने की दुकान चलाने वाले बनिए को कोई भी सरकार वह सुविधाएँ नहीं दे सकती जो टाटा या अम्बानी को देती है ; यह शास्वत सत्य है ! विचार करिए एक संवैधानिक संशोधन पर और उस किराना व्यापारी को अम्बानी बनाने की कोशिश करिए; और फिर उससे लाभ लेने की कोशिश करिए ! इस पूरी प्रक्रिया में 50 साल तो लगेंगे - और शायद अम्बानी भी ख़त्म हो जाए और किराना व्यापारी भी नया अम्बानी न बन पाए या बन भी जाए तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ! यही भारतीय राजनीति है - हम मंडला बालघाट और झबुआ के आदिवासियों को नेता बनाते हैं !ताक़त देते हैं बड़े बड़े भाषण देते हैं ; लाभ की योजनाएँ बनाते हैं और जब चुनाव आता है तो उसी आदिवासी के गाँव के लोग गाँव के सवर्ण मालगुजार से पूछ कर वोट देते है ; क्यूँकि उन्हें उसी मालगुज़ार की मज़दूरी करनी है ; वही उसे पैसे उधार देता है ; वही मदद करता है वह मालगुज़ार अगर चाहे तो मदद न कर आपको दुत्कार भी सकता है ! यही परम्परा रही है सदियों से ; यही व्यवस्थाएँ रहेंगी सदियों तक ! यही व...

डरपोंक गांधी ?

कांग्रेस पर यह लेख मेरे स्वयं के विचार हैं और हर उस व्यक्ति, संस्था, संगठन एवं कंपनी को मैं इसे शेयर करने व छापने का अधिकार इस बाध्यता के साथ देता हूँ कि वे इस लेख की आत्मा के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे !! अवस्थी सचिन ----------------------------- कांग्रेस भारत का सबसे पुराना राजनैतिक दल है ; वह दल जिसके सबसे बड़े नेता मोहनदास करमचंद गांधी को भी उनके जीवित रहते उनके ही साथीयो ने चुनौती दी और गांधी ने उस चुनौती को खुले दिल से स्वीकार किया और नेताजी ने जिस चुनाव में गांधी के प्रत्याशी को पूर्ण बहुमत से हराया उस चुनाव को जीतने के बाद भी गांधी को दुखी देखकर नेता जी ने गांधी के चरणों में अपनी जीत की माला डाल दी थी ! जबकि वे पूर्ण बहुमत से चुने हुए अध्यक्ष थे !! आज वही कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष का तो छोड़ दें प्रदेश और जिला अध्यक्ष का निष्पक्ष चुनाव नहीं करवा पा रही ! क्या हो गया है कांग्रेस को ? नेहरु के सामने उनकी पार्टी में ही कई चुनौतियां आईं और वे हर बार उस चुनौतियों से लडे और जीते ! नेहरू के बाद इंदिरा ने काफी कमज़ोर शुरुवात की और इंदिरा ने उस मुकाम को हासिल किया जिस मुकाम पर लोग...

बीजेपी हिन्दू वादी तो क्या कांग्रेस मुस्लिम वादी

चलो मान लिया बीजेपी हिंदूवादी पार्टी है ! बीजेपी सांप्रदायिक और आपकी नज़र के हिसाब से फासिस्ट पार्टी भी है ! मोदी शहंशाह हैं, ये भी मान लेते हैं, हत्यारा भी मान लेते हैं और जो कहो सब मान लेते हैं !! पर आप बताओ आप क्या हो ? इशरत एनकाउंटर भी सच साबित हुआ। बाटला एनकाउंटर भी सच साबित हुआ। अब बाकायदा जांच के बाद साबित हुआ कि फ्रिज में गाय का मांस ही था। शायद इसीलिए परिवार वाले सीबीआई जांच से मुकर गये थे। खैर उपरोक्त तीनों घटनाओं को झूठा साबित करने की कोशिश की गई। किसलिए वोटों के लिये। वोटबैंक के लिये? ये लोकतंत्र है? पर मेरा प्रश्न भी सुन लेते और उत्तर दे देते तो बड़ी कृपा होती ? क्या आप हिन्दू विरोधी पार्टी नहीं हो ? क्या आप वोटों के लिए फासिज़्म नहीं फैला रहे ? अमित शाह कहते हैं अखलाक को जान से मार देना कहीं से भी न्याय संगत नहीं था। पर क्या सैकड़ो सिक्खो की हत्या के बाद *किसी* ने कहा था, की जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है ? खैर यह भी छोटी सी बात है - बड़ी बात यह है की आपको हिंदी नहीं आती तो इतने बड़े बड़े शब्द आपके मुंह में ठूंसता कौन है ? वो कौन है जो आपको यह समझाता है की जो...

भारत : हिन्दुस्तान : इंडिया २०१४

बड़ा जांझवाती चुनाव है ये - मोदी बनाम राहुल गांधी / गांधी नेहरू बनाम सरदार पटेल - मंहगाई बनाम - आशाएं / बहुसंख्यक बनाम - अल्पसंख्यक / भ्रष्टाचार बनाम - सुशासन / जीत पर जान लगी है सबकी !! अटकलें, अफवाहें, झूठ, फरेब, पैसा, प्रतिष्ठा, कमीनापन, सच्चाई सब दाँव पर है !! कई टीमों के बीच ५ वर्ष में एक बार होने वाला कुर्सी कप इस बार फिक्स हैं !! २ टीम हैं एक मोदी की और एक विरोधी टीम जिसमे सपा, बसपा, लालू, नितीश ममता और न जाने कौन कौन खिलाडी हैं !! दूसरी टीम में एक और उप टीम थी जो पार्टी के लिए चुनाव नहीं लड़ रही हैं और चुनाव का सिर्फ मज़ा ले रही हैं या सिर्फ अपनी सीट जीतने की कोशिश में मशगूल हैं !! उसका काम था की किसी भी तरह ये वर्त्तमान सरकार निपटे और हम पार्टी आला कमान या चुनाव प्रबंधक की टांग खींच कर खुद पार्टी पे कब्ज़ा करें !! ये रणनीति पिछले CWG घोटाले के बाद से बन रही थी !! कांग्रेस की वास्तविक स्तिथि इतनी बुरी कभी नहीं रही न ही बीजेपी की इतनी बढ़िया या यूँ कहें की किसी व्यक्ति विशेष की बीजेपी में !! इसे सभी बीजेपी विरोधी, बीजेपी का कांग्रेसी करण मानते हैं ; ...

!!गाँधी के उत्तराधिकारियों से प्रश्न !!

मैं संघी - कांग्रेसी - आरक्षण विरोधी - आरक्षण के पक्षधर - समाजवादी - बीजेपी और आर टी आई एक्टिविस्ट्स के साथ रहा और उनको समझने की भरपूर कोशिश की !! अलग अलग विचार धाराओं को जानने समझने के प्रयास में सिर्फ एक चीज़ समझ पाया कि सत्ता के गलियारों तक पहुँचने के लिए जो रास्ते जाते हैं ; उन पर आने वाला हर गतिरोध आपका दुश्मन है और हर घाट आपका मित्र - मित्र इसलिए क्योंकि वो गंतव्य तक पहुँचाने वाली आपकी गति में वृद्धि करता है !! पर वर्त्तमान राजनीती में परंपरागत गतिरोध और घाट बदल गए हैं - पहले ये महगाई, गरीबी, शिक्षा, सीमा की सुरक्षा और सिंचाई के साधन होते थे !! अब ये साम्प्रदायिकता और भ्रष्टाचार पर आ कर थम गए हैं !! लगता नहीं की थर्ड फ्रंट, कांग्रेस और कम्युनिस्ट इन पुराने मापदंडों पर यकीन करते हैं !! बीजेपी शायद इन पुराने मापदंडों पर अभी भी विश्वास करती है इसलिए गुजरात का विकास मॉडल - सरदार पटेल की मूर्ति के साथ साथ नए मुद्दे जैसे भ्रस्टाचार और गुजरात में गोधरा के बाद की शांति का भी जिक्र करती है !! ये समझ में नहीं आता कि १२५ साल पुराणी कांग्रेस और उसके साथ जुडी थर्ड फ्रंट के घाघ...

लोकसभा : २०१४

वि. स. चुनाव ख़त्म हुए - लोकसभा चुनावों कि रणभेरी बजने लगी है !! परिणाम शानदार रहे हैं - जे पी के बाद कुछ ताज़ी बयार चली है !!  बी जे पी और कांग्रेस के पैरो तले जमीन खिसकी हुयी है - सच कहें तो ये नेताओं के लिए विश्वसनीयता का सन्कट है !!  इस संकट से उबरने के लिए सिर्फ विश्वसनीयता की जरूरत है - आप कितने भी चतुर पैतरे बाज़ कौटिल्य या विदुर हों अगर आप विश्वसनीय नहीं है तो आप संकट में हैं !!  ये नेताओ को समझ में आ गया है, वे सिर जोड़ के मंथन कर रहे हैं ; नए पैतरे सोच रहे हैं ,   अब अशोक रोड का दफ्तर हो या अकबर रोड का सभी एक ही बात पर चिंतन कर रहे हैं !! जनता भी चिंतन कर रही है, वह कम बुरे और ज्यादा बुरे में कम बुरे को चुन रही है या किसी नयी पार्टी को विकल्प बनाना चाह रही है !! दिल्ली के विधान सभा चुनावों में जो हुआ वह लोकसभा में होगा ऐसा नहीं है - शहरी मतदाता "आप" को वोट कर सकते हैं - पड़े लिखे ग्रामीण मतदाता भी आप कि तरफ आकर्षित हो सकते हैं ; पर आज भी भारत की ८०% लोकसभाओं की ७०% जनता ग्रामीण है, और ग्रामीण जनता "आप" से ज्यादा परचित नहीं है ; विधान सभा च...