संदेश

सनातन का कोरोना कनेक्शन

इन पर ध्यान दें : 👇 नमस्ते छुआछूत सोला वानप्रस्थ सूतक दाह संस्कार शाकाहार समुद्र पार न करना विदेश यात्रा के बाद पूरा एक चन्द्र पक्ष गांव से बाहर रहना घर मे आने से पहले हाँथ पैर धोना बाथरूम और टॉयलेट घर के बाहर बनवाना वैदिक स्नान की विधि और इसे कब कब करने है यह परंपरा ध्यान दें, हमारे ईश्वर के स्वास्थ्य खराब होने पर उनकी परिचर्या #यह वे चीज़े हैं जो मुझे याद आ रहीं हैं। आप बुजुर्गो से पूछेंगे तो और भी चीजे आपको मिलेंगी। यह हम भूल चुके हैं क्योंकि एन्टी बायोटिक, साबुन, और सेनिटाइजर बाजार में आ गए और औद्योगिक क्रांति को  मानवीय संसाधनों की जरूरत थी। आज हमें फिर वही परम्पराए नाम बदल बदल कर याद दिलाई जा रहीं है। #सोशल_डिस्टेंसिंग #क्लींलिनेस बुजुर्गो की कम इम्युनिटी आदि आदि। वानप्रस्थ आश्रम का उद्देश्य ही यह था कि वायरस बुजुर्गो पर जल्द प्रश्रय पा जाता है, फिर मजबूत होकर जवानों पर हमला करता है, इसलिए कमजोर इम्युनिटी के लोगो को वन भेज दिया जाता था।। निष्कर्ष : आना दुनिया को वहीं है जहां से हम चले थे। यही सनातन है। यह प्रकृति का संविधान है। #स्वामी_सच्चिदानंदन_जी_महाराज

राजनीति और धर्म Vs नेता और धर्मगुरु

अंग्रेज़ो को न तो धर्म गुरु पसंद थे न ही ब्राह्मण । अंग्रेज़ो ने 2 व्यवस्थाएं दीं,  1- वैकल्पिक ब्राह्मण 2- वैकल्पिक धर्म गुरु A- वैकल्पिक ब्राह्मणों का काम था, जातिगत ब्राह्मणों के समान न्याय करना और प्रशासन चलाना। B- वैकल्पिक धर्मगुरुओ का काम था संसद को नेतृत्व देना । व्यवस्थाएं तो अंग्रेज़ो ने ठीक ही दी बस एक कमी रह गयी वह थी, ब्राह्मणों के समान आदर्श और बिना अर्थ लाभ के शासन चलाने के गुर वह वैकल्पिक समाज को न दे पाए। और यहीं से शुरू हुआ, #भ्रष्टाचार #ताकत और #अनैतिकता का खेल ।। संसद को नेतृत्व देने वाले (मंत्री परिषद और राष्ट्रपति) वैकल्पिक धर्म गुरु हो या प्रशासन चलाने या न्याय करने वाले वैकल्पिक ब्राह्मण, सभी 200% भ्रष्ट और काइयां है। क्यूं? कभी आपने सोचा ? इसका सिर्फ एक ही कारण है कि अंग्रेज़ो ने इन वैकल्पिक सत्ताधारियो को अधिकार तो पूरे दिए पर, ब्राह्मणों के समान भिक्षा मांग के भोजन, कुटिया में चुटिया के साथ निवास, स्वर्ण और रथ के उपयोग पर पाबंदी एवम शराब और मांस से परहेज के नियम नही बनाये। बस यहीं से शुरू हुआ हमारा पतन। वैकल्पिक ब्राह्मण (नेता, न्यायाधीश और अधिकारी) पर अगर आज ...

चीन की न 🤔

चीन और उसकी "न" कहने की शक्ति !! एक नयी बात और ऐसी भी की दिमाग जिंझोड दे !! शक्ति चीज़ो को नकारने की आपकी क्षमता से परिभाषित होती है ! जैसा की शाश्वत सत्य है ; एक ५ किलो की वस्तु अपनी जगह पड़ी रहना चाहती है और आप उसकी इक्षा के विरुद्ध उसकी मंशा को नकारते हुए उसे  स्थान पर पदस्थापित कर दें तो ये आपकी ताकत हुयी ! किसी के न चाहते हुए भी उससे अपने मन का काम ले लेना "ताकत" है ! ये भूमिका आगे के लेख के सन्दर्भ में है !! मैंने १ माह पहले एक सी डी एम ए मोबाइल का अधिग्रहण किया ; जैसा की  सब जानते हैं सी डी एम ए स्मार्ट फ़ोन वो भी ड्यूल सिम आसानी से मिलना मुश्किल है ! ये सेट चीनी कंपनी जेड टी ई का है जो मोबाइल के बी टी एस बनाती है ! आश्चर्य जनक रूप से इस सेट में ढेरों कमियां और दोष थे ! जी पी इस ठीक काम नहीं करता था ; जी एस एम सिम में सिग्नल की समस्या थी ; बैटरी कमजोर थी ; मैंने इस मोबाइल के एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम को रुट करने का मन बनाया ; कुछ सुधर हुआ पर मैं संतुष्ट नहीं था ; काफी आर एंड डी के बाद मुझे एक चीनी (चाइना मोबाइल कंपनी) रोम मिली ; जब मैंने उसे इंस्टॉल किय...

जन मन विकृति (Mass mind distortion)

* अद्भुत अति अद्भुत * यह कला ही है हाँ कला ही जिसे जन मन विकृति (Mass mind distortion) कहते हैं। इस कला के पैटर्न को समझना आवश्यक है, मनुष्य गर्व, डर या आराम के लिए जीता है और मरता भी है बस यही 3 बिंदु इस कला को जीवित रखते हैं।। आपसे कुछ प्रश्न है उत्तर दीजिये। 1- रिफाइंड आयल और वनस्पति घी क्यों खाते हैं? 2- प्लास्टिक क्यों उपयोग करते हैं? 3- रीठा या मुल्तानी मिट्टी से क्यों नहीं नहाते? 4- जमीन पर पत्तल पर क्यों नही खाते? 5- हर समय मिनिरल वाटर की बोतल ही क्यों? कारण हैं गर्व, डर और आराम। जान का डर हो या पैसे जाने का डर। या जल्द मारने का डर या टेबल पर खाने का गर्व या वैभव का सुख और गर्व। यही वह चीजे हैं जिन्हें बाज़ारवाद पुष्ट करता है। आज डालडा से ज्यादा फायदा देसी घी की बिक्री में है तो वही सही है, पर वे उसे वैदिक पद्धति से नही बनाएंगे। प्लास्टिक जब तक फायदे मन्द था खूब उपयोग किया अब आपको मार रहा है तो बन्द होना चाहिए? हज़ारो साल से पत्तल में खा रहे थे जो कुछ वर्षों में बुरा हो गया और आपने उसे मान भी लिया क्यों? किसपर विश्वास किया और किसपर अविश्वास यह कभी सोचा है? कोका क...

शिव प्रसाद और बायो फ्यूल

गांजा एवं भांग- सनातन है ।। आजकल तमाम डे मनाने का चलन है, ऐसे ही एक वर्ल्ड वीड डे मनाया जाता है। अबकी बार यह डे इस मायने में ऐतिहासिक हो गया की अगले ही दिन हमारे रॉक स्टार प्रधा...

बेहतर धर्म और बेहतर समाज 🙏

धर्म या ईश्वर की अवधारणा मानव समाज के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी उसके लिए हवा। अपनी सारी उपलब्धियां और हार के लिए उसे कोई तो चाहिए जिसको वह इसका कारक बताये। खुद की गलतियों क...

धर्म और राजनीति

#हथौड़ा_पोस्ट धर्म और राजनीति : धर्म का राजनीति में प्रवेश राजनेताओ को पसंद नहीं। आखिर क्यूँ? सोचिये : अगर एक शंकराचार्य/ दंडी स्वामी/संत/आचार्य सत्तासीन नेताओ को निर्देशित ...