संदेश

संविधान और धर्म 🙏

चलो राजनीति से समाज शास्त्र पर आते है ।। हम बदल क्यों रहे है? प्रश्न अति महत्वपूर्ण है। 1 पीढ़ी पहले तक- जब विश्वविद्यालय में झगड़ा होता था तो कोई लड़का दूसरे को कहता था, भाई मेरी 1 ...

तीन राज्यों की हार और भाजपा

@amitshah कहते हैं कि अगला चुनाव हम युद्ध की तरह लडेंगे। जबकि 11 दिसम्बर के पहले मोटा भाई विरोधीयों को कुछ मानने ही तैयार न थे? प्रश्न यह कभी न था कि अटल सरकार भ्रष्ट थी, न ही यह प्रश्न आज उठता है कि मोदी सरकार भ्रष्ट है। प्रश्न सिर्फ यह है कि आप डरते हो और जनता को मूर्ख समझते हो। 1- आपको चुनाव में हारने का डर है इसलिए संघ की विचारधारा को किनारे कर देते हो, जबकि आप जानते हो कि इसी विचारधारा ने आपकी सरकार बनवाई है। 2- आप पूर्ण बहुमत की सरकार चलाते हुए भी डरते हो, राम मंदिर धारा 370 पर बिल लाने से डरते हो। 3- आपको अपने वोटर के स्वार्थ की चिंता नही है आप उन्हें "taken for granted" लेते हो, आप दूसरों के वोटर झपटने के लिए लालची हो। 4- आप इतिहास से कुछ नहीं सीखना चाहते, क्या जनसंघ से लेकर अटल सरकार तक आपने हर हार का विवेचन नहीं किया है? 5- क्या शाहबानो से लेकर राम भक्तो पर गोली चलाने तक के एपिसोड पर आपकी पार्टी के स्टैंड आपको नहीं मालूम हैं? 6- क्या वी पी सिंह की पार्टी और खुद VP के हाल आपसे छुपे हैं? 7- क्या आप समझते हैं कि सोशल मीडिया के इस जमाने मे आपको आपके विरोधी छोड़ दें...

हम बेवकूफो को आदर्श नहीं मान सकते पर हम बेवकूफ हैं; 🤣

चलिए आध्यात्म, मानवीयता और भारतीयता पर लौटें । "हम बेवकूफो को आदर्श नहीं मान सकते और हमें कोई स्वार्थी कहे ऐसी किसमें मजाल है? " यही भारतीय सिविलाइजेशन का मूल है, #छुट्टन_गुरु #लल्लन_महाराज - कैसे ?🙄 मै - कुछ चीज़े हैं ; जो भारतीय समाज को पश्चिमी समाज से अलग करती हैं ! १- आदर्शवाद २- त्याग ३- निस्वार्थ कर्म ४- सहिष्णुता पंगा इन्ही चीज़ों में फंसता है ; आज पश्चिमी या अभारतीय दर्शन कहता है ; कि आदर्शवाद जब जरूरी है जब हमें फायदा हो ; जीवन सिर्फ निजी फायदे के लिए है , अगर फायदा नही तो मतलब क्या ? लाभ ही तो सब कुछ है, BY HOOK OR CROOK... यही सोच संकुचित हो कर "मैं" में सिमट चली है और उतरोतर अहंकारी होती जाती है !! और भारतीय दर्शन कहता है कि अहंकार तो रावण का भी न चला... हम कहने लगे हैं - आदर्शवाद बढ़िया है पर दूसरों के लिए !! जब हमारी बात आती है तो कोई रास्ता बहाना खोज लिया जाता है, कि हम उससे बच सके। त्याग दूसरे करें हम तो अधिकार के लिए लड़ेंगे। #छुट्टन_गुरु : हम निस्वार्थ क्यों हो ? निस्वार्थ कर्म : ये क्या होता है ? चाणक्य ने कहा था कि बिना ला...

भारतीयता और पश्चिम...

हिन्दोस्तान की जिसे समझ है, वह जानता है कि इस देश ने अंगुलिमाल को सन्त स्वीकारा है, रावण को हम हर वर्ष जलाते हैं पर उसे प्रकांड पण्डित भी मानते है और रावण रचित शिव तांडव स्त्र...

राजनीति और आदर्शों का घालमेल

#मोदी_शाह_और_आरएसएस 2 साल पुरानी पोस्ट .... 1- राजनीति में कभी कुछ भी सही तरीके से किया ही नही जा सकता । आदर्शवादी तरीके से राजनीति असम्भव है। विरोधी को छकाना, भ्रमित करना और उसे वस...

सोशल मीडिया और पुरानी सोच...

#सोशल_मीडिया बुजुर्ग सोच के लोग जिन्हें लगता है कि सोशल मीडिया खेल है कुछ गलत लिख भी दिया तो जनता कुछ समय में भूल जाएगी ऐसे लोगों का अवसान तय है, लालू परिवार उनमे से 1 है। मुलाय...

छत्तीसगढ़ की राजनीती में हाथी की चाल........

मेरे मित्र लगातार ऑरकुट और निजी चर्चाओं में प्रश्न करते रहें है कि आज के दौर में बा सा पा का भविष्य क्या है ? छत्तीसगढ़ के आने वाले चुनाव में बा सा पा का क्या योगदान रहेगा? कांसी राम जी के बाद मायावती बहन का क्या भविष्य होगा? क्या बा सा पा कांग्रेस को नुकसान पहुँचायेगी ? मैं भी इस विषय पर काफी समय से लिखना चाह रहा हूँ........ आज के परिद्रश्य में बा सा पा के वैचारिक स्तर में काफी सुधार हुआ है. पार्टी जातिगत विद्वेष से ऊपर उठ कर सामाजिक और राष्ट्रीय सौहद्रता कि बात कर रही है. कुछ समय पूर्व तक तिलक तराजू और तलवार. इनको मरो जूते चार. कि विचार धारा वाली मायावती अब ब्राह्मण. बनिया और ठाकुरों को अच्छे पदों पर बैठा रही है, उनका सम्मान कर रही है. बा सा पा पर कभी भी धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप नहीं लगा न ही मुस्लिम तुष्टिकरण और धर्म परिवर्तन का ही आरोप लगा है. बहुजन समाज पार्टी पर सिर्फ १ आरोप लगता था कि पार्टी जातिगत वैमनस्यता फैलाती है जो अब अपरिहार्य है ...... आज के परिपेक्ष्य में देखा जाय तो बा सा पा एक मात्र ऐसी पार्टी दिखती है जो पूर्णतः धर्म निर्पेक्ष्य, सामाजिक, धार्मिक...

ब्राह्मणत्व Vs जंगलराज

होली और भांग : भंग की तरंग में मैने स्वप्न देखा - जो नीचे वर्णित है - ध्यान से पढ़ें इस व्यंग को ।। 4 गिलास ठंडाई, 2 चम्मच माज़ूम और 1 पाँव भांग के पकौड़े के बाद जब सच्चिदानंदन जी महाराज सोये तो उन्हें एक भयानक प्रजातान्त्रिक स्वप्न दिखा। दृश्य 1 -  घमासान चल रहा है कहीं जाट लड़ रहे हैं, कहीं पटेल युद्ध कर रहे हैं, कहीं देश द्रोही नारे लग रहे हैं तो कहीं, नेता जानवरो को पीट रहे हैं तो कहीं नेता पुत्र बलात्कार कर रहे हैं, कहीं हत्या और कुटिलता के प्रपंच रचे जा रहे हैं, कहीं नकली साधू जटा धारी चिलम चढ़ाये बैठे हैं। दृश्य 2 -  1 ब्राह्मण सफ़ेद धोती पहने चुटिया रखे खुले तन से बहते जल में सूर्य को अर्घ दे धीरे धीरे बाहर निकल रहा है । मैं - उस ब्राह्मण को रोक कर बैठ जाते है और पूछते हैं - महाराज ये समाज में हो क्या रहा है? आप सूर्य उपासना कर रहे हो और देश जल रहा है, आग लगी है देश में । ब्राह्मण मुस्कुराये - कह उठे राज मिस्त्री को, टीवी मेकेनिक का काम दोगे तो ऐसा होगा ही। वो रांगे की जगह सीमेंट और मल्टी मीटर की जगह साहुल तो लगाएगा ही। अगर मिस्त्री कुछ करता हुआ न दिखेगा तो उसस...

मोदी का अगला क़दम : जातिगत विघटन नहीं अपितु आर्थिक विषमता का फ़ायदा उठाना है !!

दलित राजनीति हो समाजवाद या सर्वजन हिताय की अवधारणा लिए हुए देश - उनको चलाने का काम तो वही कर सकता है जो समर्थ हो ! किराने की दुकान चलाने वाले बनिए को कोई भी सरकार वह सुविधाएँ नहीं दे सकती जो टाटा या अम्बानी को देती है ; यह शास्वत सत्य है ! विचार करिए एक संवैधानिक संशोधन पर और उस किराना व्यापारी को अम्बानी बनाने की कोशिश करिए; और फिर उससे लाभ लेने की कोशिश करिए ! इस पूरी प्रक्रिया में 50 साल तो लगेंगे - और शायद अम्बानी भी ख़त्म हो जाए और किराना व्यापारी भी नया अम्बानी न बन पाए या बन भी जाए तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ! यही भारतीय राजनीति है - हम मंडला बालघाट और झबुआ के आदिवासियों को नेता बनाते हैं !ताक़त देते हैं बड़े बड़े भाषण देते हैं ; लाभ की योजनाएँ बनाते हैं और जब चुनाव आता है तो उसी आदिवासी के गाँव के लोग गाँव के सवर्ण मालगुजार से पूछ कर वोट देते है ; क्यूँकि उन्हें उसी मालगुज़ार की मज़दूरी करनी है ; वही उसे पैसे उधार देता है ; वही मदद करता है वह मालगुज़ार अगर चाहे तो मदद न कर आपको दुत्कार भी सकता है ! यही परम्परा रही है सदियों से ; यही व्यवस्थाएँ रहेंगी सदियों तक ! यही व...